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Padma Awards 2024: हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सरकार पद्म पुरस्कारों (Padma Awards announces) की घोषणा करती है. ये पुरस्कार कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामलों, विज्ञान एवं इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य एवं शिक्षा, खेल, लोक सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिए जाते हैं. पद्म पुरस्कारों के तहत सरकार कुल तीन तरह के पुरस्कार (पद्म भूषण, पद्म विभूषण और पद्मश्री) देती है. लेकिन क्या आपको पता है कि इन पुरस्कारों का इतिहास क्या है और कैसे ये पुरस्कार दिए जाते हैं?
1954 में भारत सरकार ने दो सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों (भारत रत्न और पद्म विभूषण) की शुरुआत की. इस पद्म विभूषण को तीन भागों में बांटा गया- पहला वर्ग, दूसरा वर्ग और तीसरा वर्ग. लेकिन 8 जनवरी, 1955 को एक राष्ट्रपति अधिसूचना जारी करके इनका नाम पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री रख दिया गया.
पद्म पुरस्कार भारत के सबसे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार हैं. इनकी घोषणा 26 जनवरी यानी रिपब्लिक डे की पूर्व संध्या यानि 25 जनवरी को किया जाता है. ये अवॉर्ड तीन कैटेगरी में दिए जाते हैं-
पद्म पुरस्कारों के विजेताओं के नाम पद्म अवॉर्ड्स कमिटी तय करती है. इस कमिटी के सदस्यों का नाम हर साल प्रधानमंत्री तय करते हैं. कमिटी की अध्यक्षता मंत्रिमंडल के सचिव करते हैं. इसमें गृह सचिव, राष्ट्रपति के सचिव और चार से छह अन्य सम्मानित लोग सदस्य होते हैं. पुरस्कारों के लिए नॉमिनेशन प्रोसेस होता है. अच्छी बात है कि इसमें आप भी खुद को सेल्फ-नॉमिनेट कर सकते हैं. 1 मई से 15 सितंबर के बीच नॉमिनेशन मंगाए जाते हैं. सभी नॉमिनेशन कमिटी के सामने रखे जाते हैं, जो उन नॉमिनेशन में से विजेताओं के नाम चुनती है. लेकिन इसके पहले उनका वेरिफिकेशन किया जाता है. विजेताओं को उनकी जीवन की उपलब्धि (लाइफटाइम अचीवमेंट) और सामाजिक विकास में उपलब्धि के आधार पर चुना जाता है.
इस पुरस्कार के लिए विजेता नस्ल, लिंग, हैसियत, व्यवसाय के आधार पर नहीं चुने जाते, बल्कि किसी भी गतिविधि या क्षेत्र में अद्भुत या विशिष्ट उपलब्धि या योगदान के आधार पर चुने जाते हैं. कुछ खास क्षेत्र हैं, जैसे- कला, सामाजिक कार्य, पब्लिक अफेयर, विज्ञान व प्रोद्योगिकी यानी साइंस एंड इंजीनियरिंग, व्यापर व उद्योग या ट्रेड एंड इंडस्ट्री, मेडिसिन, साहित्य और शिक्षा, सिविल सेवा, स्पोर्ट्स और अन्य से विजेता चुने जाते हैं. हालांकि, PSUs में काम करने वाले सरकारी कर्मचारी, (डॉक्टर और वैज्ञानिकों को छोड़कर) इन पुरस्कारों के पात्र नहीं हैं.