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Love Trauma Syndrome causes and remedies: जब हम प्यार में होते हैं तो जीने का तरीका बदल जाता है. अपने साथी के साथ आने वाली जिंदगी के सपने देखते हैं. लेकिन, कभी-कभी प्रेम और शादी में ऐसा भी मोड़ आता है जब वही खूबसूरत रिश्ता दम तोड़ने लगता है. ऐसे में कई लोग डिप्रेशन का भी शिकार हो जाते हैं. इसे आजकल लव ट्रॉमा सिंड्रोम का नाम दिया जा रहा है. लव ट्रॉमा सिंड्रोम को देखते हुए न्यूजीलैंड की सरकार ने इसके लिए एक अभियान चलाया है. इस अभियान का नाम है लव बेटर. सरकार ने बजट में डिप्रेशन से बचाव के लिए खास प्रावधान किया है.
साइकोलॉजिस्ट नितिन शाह के मुताबिक जब हम किसी रिलेशनशिप में जाते हैं तो इसकी एक वजह होती है कि कोई आपको पसंद है. आपको उनके साथ वक्त बिताना पसंद है. आप उनके साथ रहना चाहते हैं. दूसरा कारण है कि आप एक खालीपन को पूरा करना चाहते हैं. ऐसे में वह शख्स जब किसी ऐसे को ढूंढता है जिसे वह पूरा करेगा. जब वह रिश्ता ब्रेकअप की तरफ जाता है तो उनके लिए ये बेहद मुश्किल हो जाता है.
लव ट्रॉमा की खोज 24 साल पहले यानी साल 1999 में हुई थी. इस साल लव ट्रॉमा सिंड्रोम मॉडल विकसित हुआ था. इस बीमारी के मुख्य लक्षण होते हैं भावनाओं पर कंट्रोल न होना. इसके अलावा बार-बार उपेक्षा का भाव होना, मानसिक तनाव लव ट्रॉमा सिंड्रोम के प्रमुख लक्षण में से एक हैं. मनोचिकित्सक डॉ. ज्योति कपूर के मुताबिक लव ट्रॉमा सिंड्रोम में मूड स्विंग्स काफी ज्यादा होते हैं. इससे इंसान कई बार काफी ज्यादा खुश और कई मौकों पर काफी ज्यादा दुखी हो जाता है.
लाइफ कोच मेघा सिंघल के मुताबिक लव ट्रॉमा सिंड्रोम की समस्या से निपटने के लिए सबसे पहले पैरेंट्स को अपने बच्चे को समझने की काफी ज्यादा जरूरत है. मां-बाप को अपने बच्चों से बात करने की सख्त जरूरत है. वहीं, यदि रिश्ते का कोई भविष्य नहीं है तो आपसी सहमति के साथ अलग होना ज्यादा बेहतर है.