ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के बढ़ते दौर में ऑनलाइन हैकिंग भी तेजी से बढ़ रही है.ऑनलाइन शॉपिंग में ज्यादातर ट्रांजेक्शन डेबिट और क्रेडिट कार्ड के जरिए ही होते हैं. लेकिन, ऑनलाइन खरीददारी करते वक्त कई बार ट्रांजेक्शन फंस जाता है. कभी-कभी यह दिक्कत तकनीकी रूप से हो सकती है, लेकिन कई बार आप हैकर्स के जाल में फंस जाते हैं. इस स्थिति में फंसने पर आपके बैंक अकाउंट या कार्ड की जानकारी चोरी हो सकती है. इस जाल से बचने के लिए जरूरी है कि आप जो ट्रांजेक्शन करें वह सुरक्षित हो. ऐसे में कुछ जरूरी टिप्स आपके काम आ सकती हैं.
1/7ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के मामले में बेहद सतर्क रहने की जरूरत है. जिस कंम्प्यूटर, लैपटॉप या स्मार्टफोन के जरिए आप ट्रांजेक्शन कर रहे हैं, वह सुरक्षित होना चाहिए. इंटरनेट पर मालवेयर, स्पैम और स्पाइवेयर की भरमार है. इन सबसे बचने के लिए बेस्ट प्रोटेक्शन वाले एंटीवायरस का इस्तेमाल करें. फ्री एंटीवायरस सिर्फ फिशिंग, मालवेयर और ट्रोजन से ही बचाव करते हैं. पूरी सुरक्षा के लिए एंटीवायरस का फुल वर्जन खरीद कर कम्प्यूटर में इंस्टॉल करना चाहिए.
2/7आपने सिस्टम में जो भी एंटीवायरस सॉफ्टवेयर, प्रोटेक्शन के लिए इंस्टॉल किया है. उसका ऑटो अपडेट होते रहना बहुत जरूरी होता है. इतना ही नहीं, आपके सिस्टम के दूसरे सभी सॉफ्टवेयर का भी अपडेट होते रहना जरूरी है. अगर इन सॉफ्टवेयर में कोई खराबी आ जाए तो आपका सिस्टम हैक करना किसी हैकर के लिए बेहद आसान हो सकता है. यदि सॉफ्टवेयर ऑटो अपडेट सपोर्ट नहीं करता है तो कोई ऐसा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करें, जो ऑटो अपडेट सपोर्ट करे. आप चाहें तो अपने सॉफ्टवेयर को समय-समय पर मैनुअली अपडेट भी कर सकते हैं.
3/7किसी भी वेबसाइट पर अपना कॉन्फिडेंशियल डेटा डालने से पहले चेक कर लें कि वेबसाइट एनक्रिप्शन का इस्तेमाल कर रही है या नहीं. एनक्रिप्शन वह जरूरी चीज है जिसके जरिए किसी भी डेटा को प्रोटेक्ट किया जाता है. ताकि नेटवर्क में ट्रैवल करते समय आपके डेटा को कोई नुकसान ना हो या फिर वह चोरी ना हो.
4/7एक स्टडी से इस बात का पता चला है कि अधिकतर लोग अपने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए कॉमन पासवर्ड का इस्तेमाल करते हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए. अगर किसी हैकर को आपके एक पासवर्ड का एक्सेस मिल गया तो वह आपके सभी अकाउंट तक अपनी पहुंच बना सकता है, क्योंकि आपने हर जगह एक ही पासवर्ड रखा है. इस वर्चुअल वर्ल्ड में खुद को सुरक्षित रखने के लिए हर ट्रांजेक्शन के लिए अलग-अलग पासवर्ड का इस्तेमाल करना चाहिए.
5/7यदि कोई वेबसाइट आपको कैश ऑन डिलिवरी का ऑप्शन देती है, तो यह बेहतर विकल्प है. इसका फायदा यह है कि आपको ऑनलाइन पेमेंट नहीं करना होता है. इससे आपके अकाउंट की जानकारियों के हैक होने का खतरा बिल्कुल कम हो जाता है. बहुत सारे लोग कैश ऑन डिलिवरी का विकल्प नहीं देते हैं, क्योंकि इसमें कुछ वेरिफिकेशन से गुजरना पड़ता है. लेकिन, सुरक्षित रहने के लिए यह विकल्प जरूरी है.
6/7आपके पास बहुत सारे ऑफर्स के लुभावने मेल आते होंगे. यह मेल कूपन या फिर किसी अन्य प्रकार के ऑफर देते हैं, जिन्हें इस्तेमाल करके आप कई तरह के डिस्काउंट ले सकते हैं. ऐसी स्थिति में कोशिश करें कि सीधे रिटेलर की वेबसाइट पर जाकर ही अपनी जानकारियां डालें. किसी कूपन लिंक में अपनी जानकारियां देना आपके लिए असुरक्षित हो सकता है.
7/7किसी भी रिटेलर या मर्चेंट वेबसाइट पर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने से पहले उस वेबसाइट का डिजिटल सर्टिफिकेट जरूर देख लें. एक वेबसाइट का डिजिटल सर्टिफिकेट वेबसाइट की वैधता को दर्शाता है. वेरीसाइन (VeriSign) जैसी इंडिपेंडेंट सर्विसेस इस तरह की वैधता के बारे में बताती हैं, जो किसी भी वेबसाइट को यूज करने वाले यूजर को उसके सही और गलत होने के बारे में बताता है.