स्टॉक ट्रे़डिंग: ब्रोकर्स के लिए आज से SEBI का नया नियम लागू, क्लाइंट के फंड सेटलमेंट का बदला तरीका

ब्रोकर्स को क्लाइंट के रनिंग अकाउंट में जितना भी अनयूज़्ड फंड यानी बचा हुआ फंड होगा, वो क्लाइंट के बैंक अकाउंट में वापस भेजना होगा. अब क्लाइंट की पसंद के हिसाब से अकाउंट सेटलमेंट या तो हर महीने या फिर हर तिमाही के पहले शुक्रवार को करना होगा.
स्टॉक ट्रे़डिंग: ब्रोकर्स के लिए आज से SEBI का नया नियम लागू, क्लाइंट के फंड सेटलमेंट का बदला तरीका

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स्टॉक ट्रेडिंग देखने वाले ब्रोकरेज हाउसेज़ और ब्रोकर्स के लिए आज शुक्रवार, 7 अक्टूबर, 2022 को नया नियम लागू हो रहा है. Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने क्लाइंट के फंड के सेटलमेंट का तरीका बदलने को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं. इसके तहत अब ब्रोकर्स को क्लाइंट के रनिंग अकाउंट में जितना भी अनयूज़्ड फंड यानी बचा हुआ फंड होगा, वो क्लाइंट के बैंक अकाउंट में वापस भेजना होगा. अब क्लाइंट की पसंद के हिसाब से अकाउंट सेटलमेंट या तो हर महीने या फिर हर तिमाही के पहले शुक्रवार को करना होगा. इसका मतलब है कि ब्रोकर्स के पास क्लाइंट्स का जो भी फंड बच जाएगा, उसे दिनभर का काम निपटाकर वापस क्लाइंट के अकाउंट में ट्रांसफर करना होगा.

चूंकि नियम इस महीने यानी अक्टूबर के पहले शुक्रवार 7 अक्टूबर से लागू हो रहा है, तो उदाहरण के तौर पर देखें तो या तो ट्रेडर्स को फंड सेटलमेंट हर महीने के पहले शुक्रवार को करना होगा, या हर तिमाही (इस हिसाब से जनवरी 2023, अप्रैल 2023, जुलाई 2023, अक्टूबर, 2023) के पहले शुक्रवार को करना होगा. इसके अलावा अगर वो शुक्रवार को ट्रेडिंग नहीं हो रही है, यानी छुट्टी है तो यह सेटलमेंट उसके पहले पड़ रहे गुरुवार को ही कर लेना होगा.

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क्यों यह नया नियम लेकर आई है SEBI?

सेबी ने रनिंग अकाउंट्स के लिए इस साल जुलाई में यह नई गाइडलाइंस जारी की थीं. इसके लिए रेगुलेटर ने स्टॉक एक्सचेंज, इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों और सेकेंडरी मार्केट एडवाइजरी कमिटी के साथ सलाह-मशविरा किया था.

इस नियम को लेकर सेबी ने अपना एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि सेबी यह नया नियम "क्लाइंट्स के फंड के गलत इस्तेमाल के जोखिम को कम करने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करने की दिशा में" लाया जा रहा है. इस सर्कुलर में एजेंसी ने कहा कि "क्लाइंट के मैंडेट के हिसाब से ट्रेडर को फंड या सिक्योरिटी का एक्चुअल सेटलमेंट करना होगा और इसके तहत एक रनिंग अकाउंट के हर सेटलमेंट के बीच कम से कम 30 दिन और अधिकतम 90 दिनों का गैप होना चाहिए."

इस नियम के साथ सेबी का लक्ष्य सिक्योरिटी निवेश में निवेशकों के हितों की सुरक्षा करना और सिक्योरिटी मार्केट के रेगुलेशन और डेवलपमेंट को प्रोटेक्ट करना भी है.

इसके पहले अकाउंट सेटलमेंट एक तिमाही भर में चलता रहता था, लेकिन इससे यह प्रोसेस एक दिन में हो जाएगा, जिससे सेबी यह सुनिश्चित कर सकेगी कि ब्रोकर्स क्लाइंट्स के फंड का मिसयूज़ नहीं कर रहे हों.

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