P-Notes के जरिए निवेश अक्टूबर में घटकर ₹1.26 लाख करोड़ पर, लगातार 7 महीने की तेजी बाद आई गिरावट

P-Notes Investment: आंकड़ों के अनुसार, पी-नोट्स के जरिए जिन सेक्टर्स में निवेश किया गया, उनमें घरेलू शेयर (Share), बॉन्ड (Bonds) और हाइब्रिड सिक्योरिटीज (शेयर और बॉन्ड में मिला-जुला) शामिल है. 
P-Notes के जरिए निवेश अक्टूबर में घटकर ₹1.26 लाख करोड़ पर, लगातार 7 महीने की तेजी बाद आई गिरावट

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P-Notes Investment: देश में पार्टिसिपेटरी नोट (P-notes) के जरिये निवेश अक्टूबर में घटकर 1.26 लाख करोड़ रुपये रहा है. इससे पहले लगातार 7 महीने इसमें तेजी थी. ताजा आंकड़ों के अनुसार, इसके जरिये जिन सेक्टर्स में निवेश किया गया, उनमें घरेलू शेयर (Share), बॉन्ड (Bonds) और हाइब्रिड सिक्योरिटीज (शेयर और बॉन्ड में मिला-जुला) शामिल हैं.

रजिस्टर्ड विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) पी-नोट (P-notes) ऐसे विदेशी निवेशकों को जारी करते हैं, जो खुद रजिस्टर्ड हुए बिना भारतीय शेयर बाजार का हिस्सा बनना चाहते हैं. हालांकि, उन्हें जांच-परख की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. इसके जरिये निवेश में अक्टूबर में गिरावट से पहले, वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती के साथ मार्च से पी-नोट (P-notes) के माध्यम से निवेश लगातार बढ़ रहा था.

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P-notes वैल्यू 1,26,320 करोड़ रुपये

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Sebi) के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारतीय बाजारों- इक्विटी, बॉन्ड और ‘हाइब्रिड’ सिक्योरिटीज- में पी-नोट निवेश का वैल्यू अक्टूबर के आखिर में 1,26,320 करोड़ रुपये था. सितंबर में यह 1,33,284 करोड़ रुपये था, जो छह साल का उच्चस्तर है. यह जुलाई, 2017 के बाद सबसे ज्यादा है. उस समय यह 1.35 लाख करोड़ रुपये था.

पी-नोट (P-notes) के माध्यम से निवेश में बढ़ोतरी एफपीआई इनफ्लो के रुख के अनुरूप होती है. जब वैश्विक स्तर पर जोखिम होता है, तो इसके जरिये निवेश बढ़ता है. वहीं वैश्विक परिवेश सही होने पर इसमें कमी आती है. अक्टूबर तक इसके जरिये गए कुल 1.26 लाख करोड़ रुपये में से 1.18 लाख करोड़ रुपये शेयरों में, 8,055 करोड़ रुपये बॉन्ड/सिक्योरिटीज में और 385 करोड़ रुपये हाइब्रिड प्रतिभूतियों में लगाए गए.

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