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ऑर्गेनिको स्टार्टअप के फाउंडर पूजा और ऋषभ ने गधी के दूध से बने साबुन की खासियत बताते हुए बताया कि गधी का दूध एंटी ऐजिंग मिल्क और नरिशमेंट कंडीशनिंग के तौर पर जाना जाता है.
दिल्ली के युवा पूजा और ऋषभ गधी के दूध से साबुन तैयार करते हैं, जो पूरी तरह से ऑर्गेनिक है. जो लोग गधों के पालन और उनके प्रजनन से जुड़े हैं, पूजा और रिषभ उनसे दूध खरीदकर साबुन तैयार करते हैं. गधी के दूध के साथ-साथ इस साबुन में प्राकृतिक संघटकों (Natural ingredients) यानी नीम, ऐलोवेरा, चंदन, पपीता पाउडर, बदाम का तेल, हल्दी आदि को मिलाया जाता है जो त्वचा के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं.
ऑर्गेनिको स्टार्टअप के फाउंडर पूजा और ऋषभ ने गधी के दूध से बने साबुन की खासियत बताते हुए बताया कि गधी का दूध एंटी ऐजिंग मिल्क और नरिशमेंट कंडीशनिंग के तौर पर जाना जाता है इसमें ए, बी1, बी2, ब6, सी, डी, ई विटामिन और ओमेगा 3, ओमेगा 6, केल्शियम, जैसे ऐलीमेंटस होते हैं जो स्कीन से जुड़ी कई बिमारीयों के साथ-साथ रिंकल, एक्जिमा को भी कंट्रोल करते हैं. गधी के दूध के फायदों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने गधी के दूध से साबुन बनाना शूरू किया. साबुन की कीमत 499 रूपए है.
गधी के दूध में सेहत का खजाना
पूजा ने बताया कि मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा अपनी खूबसरती बढ़ाने के लिए गधी के दूध से नहाती थीं. इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन पाए जाते हैं जो प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में बेहद कारगर हैं. ऋषभ ने बताया कि फिलहाल वे दो तरह के गधी के दूध के साबुन तैयार करते हैं पहला, जो गधी के दूध में शहद और चारकोल का इस्तेमाल करके बनाते हैं जो एक्ने और ऑयली त्वचा के लिए लाभदायक होता है. दूसरा, साबुन गधी के दूध में ऐलोवेरा, चंदन, नीम, पपीता, हल्दी और कई तरह के तेलों का इस्तेमाल कर तैयार किया जाता है जो नाज़ुक त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है.
10 घंटे के अंदर इस्तेमाल करना होता है दूध
ऋषभ ने बताया कि गधी के दूध से साबुन बनाना आसान नहीं क्योंकि जो लोग गधी के पालन से जुड़े हैं, उन्हें समझाना पड़ता है और साथ ही गधी के दूध देने का समय सुबह 4 बजे से 6 बजे का होता है. उस दूध को सिर्फ 10 घंटे के अंदर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसलिए जिस दिन दूध निकालते है उसका प्रडोक्शन भी उसी दिन करना होता है.
पूजा और ऋषभ ने बताया कि जब वह पढ़ाई कर रहे थे तब उन्हें डेयरी सेक्टर में कुछ नया करने का प्रोजेक्ट दिया गया था. इस प्रोजेक्ट के दौरान उनके दिमाग में यह विचार आया. उन्होंने तमाम अध्ययन के बाद इसे स्टार्टअप के तौर पर शूरू किया.

गधा पालकों की आमदनी में इजाफा
उन्होंने बताया कि इससे गधा पालन और प्रजनन से जुड़े लोगों को भी फायदा पहुंच रहा है. उनकी आय में भी बढ़ोतरी हो रही है. क्योंकि बहुत कम लोग जानते हैं कि गधी का दूध इतना लाभदायक होता है. कई जगहों पर 2000 से 3000 रुपये प्रति लीटर बिकता है. यानी कि एक चम्मच दूध की कीमत 50 से 100 रुपये है. पूजा ने बताया कि अभी फिलहाल वह गाज़ियाबाद के लोनी, डासना और महाराष्ट्र के सोलापुर से गधी का दूध खरीद रहे हैं. उनकी टीम में छ: सदस्य हैं जो इस प्रोजेक्ट से जुड़े हैं.
पूजा कौल ने बताया कि सिर्फ साबुन ही ऑर्गेनिक नहीं है बल्कि, साबुन की पैकिंग पर खास ख्याल रखा गया है. पैकिंग भी पुरी तरह से इको फ्रेंडली है. सुपारी के पेड़ के छाल से साबुन का कवर तैयार किया गया है. जूट के बैग में साबुन को दिया जाता है. पूजा ने बताया कि मौजूदा सरकार द्वारा जिस तरह से स्टार्ट अप को बढ़ावा दिया गया है. इसके कारण युवा नए-नए प्रयोग करने के लिए तैयार हैं.