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SIP Calculator: बचपन में हर किसी ने कम्पाउंड इंटरेस्ट (Compound Interest) के बारे में पढ़ा और जाना होगा. एडल्ट होने के बाद जब आप पर्सनल फाइनेंस को मैनेज करना शुरू करते हैं तो पावर ऑफ कम्पाउंडिंग (Power of Compounding) की हकीकत का पता चलता है. फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि पावर ऑफ कम्पाउंडिंग का बेनिफिट लॉन्ग टर्म में समझ में आता है. अगर कोई निवेशक बिना निकाले अगले 10-15-20 सालों के लिए SIP करता है, तो उसे कम्पाउंडिंग का उचित लाभ मिलेगा.
पावर ऑफ कम्पाउंडिंग में निवेशक को डबल रिटर्न मिलता है. एक रिटर्न मूलधन पर मिलता है और दूसरा रिटर्न इंटरेस्ट इनकम पर मिलता है. चूंकि, इसमें ब्याज के हिस्से को निकाला नहीं जाता है, ऐसे में यह कम्पाउंड रिटर्न देने का काम करता है. अगर लॉन्ग टर्म में अपने लिए वेल्थ बनाना है तो पावर ऑफ कम्पाउंडिंग (Power of Compounding) की मदद से यह आसान हो जाता है.
अगर कोई निवेशक रिटायरमेंट की प्लानिंग (Retirement Planning) कर रहा है और हर महीने 5000 रुपए की SIP करता है. वह ऐसे फंड में निवेश कर रहा है जिसका सालाना औसत रिटर्न (CAGR) 12 फीसदी है. रिटायरमेंट पर उसे कितना पैसा मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि रिटायरमेंट की प्लानिंग किस उम्र में की गई थी.
SIP Calculator के मुताबिक, अगर निवेशक ने 25 साल की उम्र में रिटायरमेंट प्लान किया तो 60 साल पूरा होने के बाद उसके पास 3.25 करोड़ रुपए होंगे. 30 साल की उम्र में रिटायमेंट के लिए जमा करने की शुरुआत करने पर उसके पास कुल 1.8 करोड़ रुपए का फंड होगा. अगर उसने 35 साल में इसकी शुरुआत की होगी तो उसका फंड केवल 95 लाख रुपए का होगा. जाहिर है कि केवल 5 साल पहले निवेश शुरू करने पर मिलने वाला रिटर्न करीब डबल हो जाता है. ऐसा Power of Compounding के कारण संभव हो पाता है.
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