ELSS में निवेश करना है तो 31 मार्च के चक्कर में मत पड़िए! वर्ना धरी की धरी रह जाएगी टैक्स छूट

ELSS Investment: अकसर लोग ELSS में निवेश फाइनेंशियल ईयर एंड होने से पहले शुरू करते हैं. लेकिन अकसर ध्यान नहीं देते और लेट कर देते हैं, जिससे उन्हें निवेश का टैक्स सेविंग के लिहाज से ज्यादा फायदा नहीं मिलता.
ELSS में निवेश करना है तो 31 मार्च के चक्कर में मत पड़िए! वर्ना धरी की धरी रह जाएगी टैक्स छूट

ELSS Tax Saving का बेहतर ऑप्शन है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ELSS Investment: ELSS यानी Equity Linked Saving Scheme में निवेश युवा निवेशकों और सैलरीड प्रोफेशनल्स के बीच काफी पॉपुलर इन्वेस्टमेंट टूल है. इसकी खास बात ये भी है कि इसपर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख तक की सालाना छूट तो मिलती ही है, ऊपर से ये सबसे कम लॉक इन पीरियड वाला टैक्स सेविंग प्रॉडक्ट है. ऐसे में फाइनेंशियल ईयर एंड होने से पहले अकसर लोग ELSS में निवेश शुरू करते हैं. लेकिन अकसर लोग ध्यान नहीं देते और लेट कर देते हैं, जिससे उन्हें निवेश का टैक्स सेविंग के लिहाज से ज्यादा फायदा नहीं मिलता. अगर आप भी टैक्स बचाने के लिए ELSS में निवेश करना चाहते हैं तो आपको भी 31 मार्च तक इंतजार नहीं करना चाहिए. जानें क्यों.

फाइनेंशियल ईयर से पहले करना होता है निवेश

किसी भी टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट पर टैक्स छूट पाने के लिए उसका उस फाइनेंशियल ईयर यानी कि 1 अप्रैल से 31 मार्च की अवधि के तहत आना जरूरी होता है, तभी आप किसी भी प्रॉडक्ट पर टैक्स क्लेम कर सकते हैं. इसीलिए जनवरी-फरवरी में आपका टैक्स बेनेफिट कैलकुलेट करने के लिए कंपनियां इन्वेस्टमेंट प्रूफ मांगती हैं. अगर आपने ELSS में निवेश कर रखा है तो आप इसका प्रूफ दे सकते हैं और टैक्स बचा सकते हैं. और अगर नहीं किया है तो तभी कर सकते हैं, और मार्च तक का इंतजार खत्म कर सकते हैं.

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कई कारणों से अटक सकता है ट्रांजैक्शन

मान लीजिए आप वित्तवर्ष खतम होने के आखिरी कुछ दिनों में अपना निवेश शुरू करते हैं और किन्हीं कारणों से ट्रांजैक्शन अटक जाता है, या चेक रिजेक्ट हो जाता है, या फिर कोई और टेक्निकल प्रॉब्लम आ जाती है, अगर बाद में भी ये समस्या ठीक हो जाती है तो भी आपको इसपर कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी. आपको निवेश के वक्त अकाउंट खुलवाने और KYC प्रोसेस पूरा कराने वगैरह में टाइम लग सकता है, हो सकता है कि इन्वेस्टमेंट प्रूफ मिलने में ही टाइम लग जाए. ऐसे में ये काम पहले निपटाना बेहतर रहेगा.

निवेश ही बेकार गया तो!

अब मान लीजिए कि आपका ELSS में निवेश करने का काफी पहले से मन था, लेकिन आप सही फंड नहीं चुन पा रहे थे, या फिर आपको सही सलाह नहीं मिल रही थी. लेकिन क्योंकि हाथ से टाइम निकल रहा है, ऐसे में टैक्स बचाने के चक्कर में आपने जल्दी-जल्दी में निवेश शुरू कर दिया. इसका नुकसान ये हो सकता है कि आपने गलत फंड में पैसे डाल दिए, या जो ऑप्शन चुने बाद में उनका कोई फायदा नजर नहीं आ रहा. अगर आपने पहले से निवेश पर फैसला किया होता तो आप सही निवेश कर पाए होते, दूसरा इतने टाइम में आपके पैसे भी बढ़ गए होते. ऐसे में आपको इन सारी बातों का ध्यान रखते हुए जितनी जल्दी हो सके निवेश शुरू कर लेना चाहिए, ताकि आप आराम से टैक्स बेनेफिट क्लेम कर सकें.

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