Pink Tax: बस महिलाओं को चुकाना पड़ता है ये खास टैक्स, जानिए क्यों है इनकम टैक्स, GST से बिल्कुल अलग

Pink Tax: पिंक टैक्स कोई साधारण टैक्स नहीं है. ये एक तरीके का जेंडर बेस्ड प्राइज डिस्क्रिमिनेशन है, जो महिलाएं अपने सामान और सर्विसेस के लिए चुकाती हैं.
Pink Tax: बस महिलाओं को चुकाना पड़ता है ये खास टैक्स, जानिए क्यों है इनकम टैक्स, GST से बिल्कुल अलग

Pink Tax: इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स और जीएसटी के बारे में अधिकतर लोगों ने सुना होगा. लेकिन शायद ही कुछ लोग हैं जिन्हें पिंक टैक्स (Pink Tax) के बारे में जानकारी नहीं है. ये कोई एक्चुअल टैक्स नहीं है, जो सरकार की तरफ से लगाया जाता है. बल्कि आदमियों की तुलना में ये एक्ट्रा पैसा महिलाओं को चुकाना पड़ता है. इस पिंक टैक्स के जरिए कंपनियां आपका टैक्स काट रही हैं. हालांकि अधिकतर लोग इस बारे में नहीं जानते हैं, लेकिन ये दूसरे तरीके से आपकी जेब खाली कर रहा है. इसका सबसे ज्यादा असर सीधा महिलाओं पर पड़ रहा है. आइए जानते हैं आखिरकार क्या है पिंक टैक्स.

महिलाओं को क्यों चुकाना पड़ता है ये पिंक टैक्स

पिंक टैक्स कोई साधारण टैक्स नहीं है. ये एक तरीके का जेंडर बेस्ड प्राइज डिस्क्रिमिनेशन है, जो महिलाएं अपने सामान और सर्विसेस के लिए चुकाती हैं. एवरेज के हिसाब महिलाओं से प्रोडक्ट पर 7% ज्यादा पैसे लिए जाते हैं. वहीं अगर पर्सनल केयर पर देखें, तो ये अंतर आता है 13% का.

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क्या है पिंक टैक्स?

जेंडर के हिसाब से पिंक टैक्स को वसूला जाता है. खासकर की तब जब कोई प्रोडक्ट्स महिलाओं के लिए डिजाइन किया गया हो. इसके साथ ही कंपनी परफ्यूम, पेन, बैग और कपड़े इन सबके लिए भी महिलाओं से ज्यादा वसूलती है. भारत में महिलाओं को प्रोडक्ट्स की कीमत से ज्यादा चुकाना होता है.

एग्जांपल के तौर पर देखा जाए, तो कई जगहों पर जैसे कि सैलून में महिलाओं से आदमियों की तुलना में ज्यादा वसूला जाता है. वहीं महिलाओं के पर्सनल केयर जैसे कि बॉडी वॉश, साबुन, क्रीम आदमियों की तुलना में महंगे होते हैं. वहीं महिलाओं को बाल कटवाने के लिए पुरुषों की तुलना में ज्यादा रुपए खर्च करने पड़ते हैं.

क्या है वजह?

इसके पीछे वजह ये मानी जाती है कि महिलाएं बहुत ज्यादा प्राइज सेंसिटिव होती हैं. अगर उन्हें प्रोडक्ट्स पसंद आ जाए और उसकी जितनी कॉस्ट होती है, महिलाएं उसे कम कराने की वजाय उतने में ही खरीद लेती हैं. यहीं वजह है कि कंपनियां महिलाओं से ज्यादा पैसा वसूलती हैं. ये कंपनियों की अब मार्केटिंग स्ट्रैटजी बन गई है.

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