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EPFO Interest Rates: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने साल 2022-23 के लिए भविष्य निधि में मिलने वाले ब्याज दर को 8.1 फीसदी पर बरकरार रख सकता है. वहीं, कोविड 19 के दौर के मुकाबले अब ईपीएफओ की निकासी घटी है. वहीं, इक्विटी में निवेश से कमाई बढ़ गई है. 25 मार्च और 26 मार्च को सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की अहम बैठक होने वाली है. आपको बता दें कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने मार्च 2021 में वित्तीय वर्ष 2020-2021 में ईपीएफ डिपॉजिट पर ब्याज दर 8.5 फीसदी निर्धारित की थी.
साल 2016-2017 में सेंट्रल ट्रस्टीज बोर्ड ने पीएफ की ब्याज दर 8.65 फीसदी निर्धारित की थी. वित्तीय वर्ष 2017-18 में ये 8.55 फीसदी था. साल 2018-19 में इसे एक बार फिर बढ़ाकर 8.65 फीसदी कर दिया गया था. साल 2019-20 में ब्याज दर 8.50 फीसदी थी. 2020-21 में इसमें कोई भी बदलाव नहीं किया गया था. साल 2021-22 में इसे घटाकर 8.10 फीसदी कर दिया गया है. ये पिछले चार दशक में सबसे कम ब्याज दर थी. साल 1977-78 में ब्याज दर आठ फीसदी थी.
ईपीएफओ ने ट्विटर पर एक शिकायत के जवाब में कहा था कि खाते में पीएफ की राशि ट्रांसफर करने की प्रकिया चलती रहती है. ऐसे में खाते में रकम जल्दी ही आ जाएगी. खाताधारक को कोई नुकसान नहीं होगा. आपको बता दें कि सैलरी का 12 फीसदी ईपीएफ अकाउंट में जमा किया जाता है. केंद्र सरकार ने एक फरवरी 2023 को पेश किए आम बजट में ईपीएफ से पैसे की निकासी पर राहत देने का ऐलान किया था. नए नियम के तहत पीएफ में जमा पैसे की निकासी पर लगने वाले टीडीएस को 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर दिया गया है.
ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक आप पैसे की निकासी के लिए जो कारण चुनते हैं उसी हिसाब से ये तय होता है कि कितने पैसे आपको मिलने वाले हैं. यदि नौकरी जाने के कारण आपको दो महीने तक सैलरी नहीं मिली है तो पीएफ में जमा पैसा निकाल सकते हैं.