अच्छी सैलरी और प्रमोशन के लिए भारत के कई नौकरीपेशा बदल सकते हैं नौकरी, PwC रिपोर्ट में हुआ खुलासा

लगभग 24 फीसदी भारतीय कर्मचारियों का मानना है कि AI उनके काम की प्रकृति को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करेगा और अगले पांच सालों में काम करने के लिए आवश्यक कौशल में काफी बदलाव आएगा.
अच्छी सैलरी और प्रमोशन के लिए भारत के कई नौकरीपेशा बदल सकते हैं नौकरी, PwC रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Image Source: Reuters

एक रिपोर्ट में यह बात समाने आई है कि बेहतर वेतन पैकेज और प्रमोशन की उम्मीद करने वाले लगभग 42 फीसदी भारतीय कर्मचारी अगले साल नौकरी बदल सकते हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 26 फीसदी है. वैश्विक कंसल्टेंसी फर्म PwC के अनुसार, जेन जेड (GEN-Z), जेन एक्स (GEN-X) और बूमर्स की तुलना में मिलेनियल्स वेतन वृद्धि (74 फीसदी) और प्रमोशन (74 फीसदी) को लेकर अधिक इच्छुक हैं. सभी स्तरों पर, 73 फीसदी वरिष्ठ अधिकारियों, 70 फीसदी प्रबंधकों और 63 फीसदी गैर-प्रबंधकों की ओर से वेतन वृद्धि की मांग करने की उम्मीद है.

अच्छी सैलरी और प्रमोशन की मांग

PwC इंडिया के पार्टनर कार्तिक ऋषि ने कहा, अधिकांश भारतीय लीडर अपने व्यवसायों की भविष्य की सफलता के लिए अपने कार्यबल के बदलने की गंभीरता से अवगत हैं. इसी प्रकार उनके काम और कार्यस्थल में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं, भारत में कर्मचारी कौशल को बढ़ाने की आवश्यकता के बारे में अत्यधिक जागरूक हैं, यह उनके करियर निर्णयों में एक महत्वपूर्ण कारक बनता जा रहा है.

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अगले पांच वर्षों में कार्य कौशल में बदलाव

इसके अलावा, रिपोर्ट से पता चला है कि 51 फीसदी भारतीय कर्मचारियों का मानना है कि वैश्विक उत्तरदाताओं के 31 फीसदी की तुलना में AI काम पर उनकी उत्पादकता बढ़ाएगा, बशर्ते उनके संगठन अपस्किलिंग अवसरों के साथ समर्थन करें.
लगभग 62 फीसदी का मानना है कि अगले पांच वर्षों में अपना काम करने के लिए आवश्यक कौशल में काफी बदलाव आएगा.

AI की वजह से नौकरी में आई अनिश्चितता

PwC इंडिया की पार्टनर अनुमेहा सिंह ने कहा, एआई की बढ़ती अनिश्चितता के बीच कार्यबल सभी मामलों में अपने नियोक्ताओं से अधिक की मांग कर रहा है. वर्कफोर्स केवल प्रतिस्पर्धी मुआवजे के साथ समझौता नहीं कर रहा है, बल्कि अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नौकरी में अवसर तलाश रहा है. लगभग 24 फीसदी भारतीय कर्मचारियों का मानना है कि एआई उनके काम की प्रकृति को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करेगा, जो वैश्विक औसत से 10 फीसदी अधिक है. वैश्विक उत्तरदाताओं के 13 फीसदी की तुलना में लगभग 21 फीसदी का मानना है कि एआई उनका काम संभाल लेगा.

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