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आसान भाषा में कहें तो, कर्मचारी द्वारा PF खाते में 12% से ऊपर के कॉन्ट्रिब्यूशन को VPF कहा जाता है. अगर आप इसका फायदा उठाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कंपनी के HR से बात करना होगी, और यह जानकारी देना होगी कि आप PF खाते में अपना कॉन्ट्रिब्यूशन बढ़ाना चाहते हैं. EPFO के तहत आने वाली सभी कंपनी के लिए अपने कर्मचारी को EPF (Employee Provident Fund) का फायदा देना जरूरी है. VPF वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड कर्मचारी अपनी तरफ से योगदान 12% से ज्यादा कर सकते हैं. वह चाहें तो 100% तक योगदान कर सकते हैं. लेकिन यहां एंप्लॉयर की तरफ से किया जाने वाला योगदान नहीं बढ़ाया जा सकता. VPF की फैसिलिटी सिर्फ कर्मचारियों के लिए होती है.
क्योंकि यह एक इन्वेस्टमेंट प्लान है यहां आप अपने PF अकाउंट में आने वाले एक फिक्स अमाउंट से ज्यादा पैसा डाल कर इन्वेस्ट कर सकते हैं. PF खाते में जहां आपकी बेसिक सैलरी का 12% इन्वेस्ट होता है, वहीं आप VPF के तहत इसमें जमा की जाने वाली रकम को 12% से ज्यादा भी बढ़ा सकते हैं. इस पर आपको 8.1% तक का ब्याज भी मिल जाता है.
अगर हम VPF की जगह PF यानी कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड की बात करें तो आपको सिर्फ 7.1% का ही रिटर्न मिलता है. इसके अलावा अगर देश के टॉप क्लास बैंकों में भी फिक्स्ड डिपॉजिट की बात करें तो अधिकतम सिर्फ 6% ही रिटर्न देखने मिल रहा है. वहीं सीनियर सिटीजन को एफडी पर अधिकतम सिर्फ 6.50% का ही रिटर्न मिल रहा है.
PF में आप अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक के इन्वेस्टमेंट पर ही टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं. लेकिन VPF में आप 2.5 लाख रुपए तक के निवेश पर टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं.