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(Image: Reuters)
Air pollution in Delhi: दिल्ली में प्रदूषण की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कल यानी 16 नवंबर को इस मसले पर एक इमरजेंसी मीटिंग करने का आदेश दिया है, जिसमें पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी का शामिल होना जरूरी है. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और NCR रीजन की राज्य सरकारों को वर्क फ्रॉम होम लागू करने के लिए कहा है. इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार यानी 17 नवंबर को होगी.
चीफ जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली बेंच ने केंद्र सरकार को मंगलवार को एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाने का आदेश दिया, जिसमें गैर-जरूरी कंस्ट्रक्सशन ट्रांसपोर्ट, पावर प्लांट्स पर रोक लगाने और वर्क फ्रॉम होम जैसे कदम उठाने के लिए कहा है. बेंच ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी को इस मीटिंग में शामिल होने के लिए कहा है.
बेंच ने कहा, ''प्रदूषण के मसले पर दाखिल एफिडेविट पर सुनवाई के बाद हम इस नतीजे पर आए हैं कि प्रदूषण की बड़ी वजह कुछ हिस्सों में पराली जलाने के अलावा कंस्ट्रक्शन गतिविधि, इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट, पावर एंड व्हीकलर ट्रैफिक है. एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमिशन की ओर से कुछ फैसले किए गए हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि वे एयर पॉल्यूशन पैदा करने वाली वजहों को कंट्रोल करने के लिए क्या कदम उठाने जा रहे हैं.''
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने हरियाणा और पंजाब सरकार से किसानों को दो हफ्ते के लिए पराली जलाने से रोकने के लिए कहा है. साथ ही केंद्र सरकार और एनसीआर राज्यों को कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम हो लागू करने के लिए कहा है. मामले की सुनवाई कर रही बेंच में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्य कांत भी हैं.
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिल्ली और उत्तरी राज्यों में फिलहाल प्रदूषण की बड़ी बजह पराली जलाना नहीं है. इसका कुल प्रदूषण में सिर्फ 10 फीसदी कंट्रीब्यूशन है.