देश की जीडीपी में कृषि का योगदान 14 फीसदी है. और देश की आधे से ज्यादा आबादी खेती-बाड़ी पर निर्भर करती है. बढ़ते शहरीकरण और खेती में केमिकलों के इस्तेमाल से खेत की मिट्टी की उर्वरा ताकत लगातार कम हो रही है, जिसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर देखा जा रहा है.
1/7केंद्र की मोदी सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और गांवों की दशा सुधारने में लगातार काम कर रही है. इसी मकसद से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की गई थी. इस योजना का मकसद खेत की मिट्टी में आए पोषक तत्वों की कमी को दूर करके उत्पादन बढ़ाना और खेती में केमिकल उवर्रकों का कम से कम इस्तेमाल करना है.
2/7आज मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिवस मनाया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 फरवरी, 2015 को राजस्थान के सूरतगढ़ में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरूआत की थी. इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक दो वर्ष में किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करना है ताकि मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी दूर करने के उपाय किये जा सकें.
3/7किसानों तक पहुंच वाली देश की ये सबसे बड़ी योजना है. पहले चक्र में साल 2015 से 2017 के दौरान 10. 74 करोड़ किसानों को सॉयल कार्ड दिए गए. दूसरे चक्र में 2019 तक करीब पौने बारह करोड़ किसानों को यह कार्ड दिया जा चुका है.
4/7कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि दूसरे चरण में 11.74 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) का वितरण किया गया है, उसका लाभ हमारे किसानों को मिला है. उन्होंने कहा कि इस दिशा में अभी और काम करने की जरूरत है.
5/7नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में मॉडल गांव बनाए गए हैं. इन गांवों में हर खेत की मिट्टी की जांच की जा रही है. डेवलपमेंट ऑफ़ मॉडल विलेज कार्यक्रम के तहत अब तक राज्यों और केन्द्र शासित देशों में 6,954 गांवों का चयन किया है. इनमें से 26.83 लाख मिट्टी के नमूने इकट्ठा करने का टारगेट बनाया गया है. इनमें से 21 लाख सैम्पल इकट्ठे किए जा चुके हैं.
6/7कृषि मंत्री ने बताया कि पहले 1.78 करोड़ नमूनों की जांच प्रतिवर्ष होती थी, अब यह संख्या बढ़कर 3.33 करोड़ हो गई है. इसके लिए देश में मिट्टी की टेस्टिंग लैबों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है. देश में इस समय छोटी-बड़ी 7949 लैब हैं, जो किसानों और खेती के हिसाब से नाकाफी कही जा सकती हैं. देशभर में 10,845 स्वायल टेस्टिंग लैब बनाएगी. ताकि किसान अपनी खेती के स्वास्थ्य के हिसाब से उसमें उर्वरक डाल सकें.
7/7कृषि मंत्री ने कहा कि स्वायल हेल्थ कार्ड स्कीम (Soil Health Card Scheme) पर 2009 से 2014 के बीच 93.92 करोड़ रुपये का बजट था. जबकि 2014 से 20 तक इसके लिए 1122 करोड़ रुपये का बजट है.