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सरकार ने बुधवार को राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड के गठन को मंजूरी दे दी. बोर्ड देश में हल्दी और इसके उत्पादों के विकास के साथ निर्यात बढ़ाने पर ध्यान देगा. हल्दी के स्वास्थ्य से जुड़े लाभ को को लेकर दुनियाभर में इसको लेकर काफी संभावनाएं और रुचि है. केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिये गये निर्णय की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2030 तक हल्दी निर्यात को मौजूदा के 1,600 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 8,400 करोड़ रुपए (एक अरब अमेरिकी डॉलर) करने की योजना बनाई है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को तेलंगाना में एक समारोह में बोर्ड की स्थापना की घोषणा की थी और केंद्र ने बुधवार को प्रस्ताव को अधिसूचित कर दिया. इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि हल्दी के लिये बोर्ड स्थापित करने का फैसला तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के किसानों की लंबे समय से जारी मांग को पूरा करता है.
बोर्ड अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने, मूल्य संवर्धन से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिये हल्दी उत्पादकों के क्षमता निर्माण और कौशल विकास में मदद करेगा. वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि बोर्ड हल्दी की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों तथा ऐसे मानकों के अनुपालन को भी बढ़ावा देगा.
बयान के अनुसार, बोर्ड में केंद्र सरकार की तरफ से नियुक्त अध्यक्ष के अलावा आयुष मंत्रालय, औषधि विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, वाणिज्य और उद्योग विभाग के साथ तीन राज्यों से प्रतिनिधि (बारी-बारी के आधार पर) होंगे. अनुसंधान में शामिल राष्ट्रीय/राज्य संस्थानों, चुनिंदा हल्दी किसानों और निर्यातकों के प्रतिनिधि भी बोर्ड में शामिल होंगे. बोर्ड के सचिव की नियुक्ति वाणिज्य विभाग करेगा.
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