आखिरी सलाम! सुषमा स्वराज के वो 4 फैसले, जिनके लिए हर हिंदुस्तानी उन्हें याद करेगा

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीमारी के चलते चुनाव लड़ने से भी इनकार कर दिया था. इससे पहले 2014 से 2019 के बीच सरकार में उन्होंने विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली.
आखिरी सलाम! सुषमा स्वराज के वो 4 फैसले, जिनके लिए हर हिंदुस्तानी उन्हें याद करेगा

विदेश मंत्री रहते उनके 4 फैसले जो शायद ही कोई भूल सकता है. (फोटो: PTI)

पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज का मंगलवार रात निधन हो गया. वह 67 साल की थीं. पिछले लंबे समय से बीमार थीं. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीमारी के चलते चुनाव लड़ने से भी इनकार कर दिया था. इससे पहले 2014 से 2019 के बीच सरकार में उन्होंने विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली. बतौर विदेश मंत्री उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जिसकी तारीफ न सिर्फ भारतीयों ने की बल्कि पूरी दुनिया भी उनकी मुरीद हो गई. उनके निधन से देशभर में शोक की लहर है. विदेश मंत्री रहते उनके 4 फैसले जो शायद ही कोई भूल सकता है और हर भारतीय उन्हें हमेशा याद करेगा.

4640 भारतीयों को सुरक्षित बचाया
यमन में जब हूथी विद्रोहियों और सरकार के बीच जंग छिड़ी थी तो हजारों भारतीय वहां फंसे थे. जंग लगातार बढ़ रही थी और सऊदी अरब की सेना लगातार यमन में बम गिरा रही थी. इसी बीच यमन में फंसे भारतीयों ने विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज से मदद की गुहार लगाई. यमन में फंसे भारतीयों के लिए सुषमा स्‍वराज ने ऑपरेशन राहत चलाया और ऑपरेशन के दौरान साढ़े पांच हजार से ज्‍यादा लोगों को बचाया गया. इसमें भारत के अलावा 41 देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला गया. इसमें से 4640 भारतीय शामिल थे.

सूडान के सिविल वॉर में बचाई भारतीयों की जान
दक्षिण सूडान में छिड़े सिविल वॉर के दौरान भी फंसे भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी कराने में सुषमा स्‍वराज का बड़ा रोल रहा. उन्होंने यहां ऑपरेशन संकटमोचन की शुरुआत की. इस ऑपरेशन के तहत दक्षिण सूडान में फंसे 150 से ज्‍यादा भारतीयों को बाहर निकाला गया. इसमें 56 लोग केरल के रहने वाले थे.

लीबिया में भी पहुंचाई मदद
लीबिया में सरकार और विद्रोहियों के बीच छिड़ी जंग में भी कई भारतीय वहां फंस गए थे. लीबिया से भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने की तैयारी तेज की गईं और 29 भारतीयों को सुरक्षित भारत लाया गया. हालांकि, इस दौरान एक भारतीय नर्स और उसके बेटे की मौत हो गई.

15 साल पहले बिछड़ी बेटी की हुई वतन वापसी
वह सुषमा स्वराज ही थीं, जिन्होंने 8 साल की मासूम की वतन वापसी कराई. सुषमा स्‍वराज की कोशिशों के बाद 15 साल पहले भटककर सरहद पार पाकिस्‍तान पहुंची मासूम गीता को भारत वापस लाया जा सका. गीता जब भारत लौटी तब उसकी उम्र 23 साल हो चुकी थी. गीता भारत आने के बाद सबसे पहले विदेशमंत्री सुषमा स्‍वराज से मिली.

अंतरराष्ट्रीय छवि की धनी
विदेश मंत्री के तौर पर सुषमा स्वराज ने कई ऐसे काम किए, जिसके लिए न सिर्फ हिंदुस्तान बल्कि दुनिया के कई देशों के लोगों ने सिर झुकाकर उन्हें सलाम किया. मोदी सरकार की तेज तर्रार मंत्रियों में से एक सुषमा स्वराज ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को भी खूब लताड़ा.

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