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Gold Outlook next year: सोना और चांदी निवेश का परंपरागत साधन है. अपने देश में गोल्ड और गोल्ड ज्वैलरी के प्रति लोगों का अलग क्रेज है. फेस्टिव सीजन आ रहा है और माना जा रहा है कि इसमें फिजिकल गोल्ड (Gold demand in India) की डिमांड बढ़ेगी. दूसरी तरफ दुनिया के सामने अभी तमाम तरह की चुनौतियां हैं. एक तरफ महंगाई आसमान पर है, दूसरी तरफ मंदी का खतरा बढ़ रहा है. ऐसे में निवेश के लिहाज से गोल्ड (Investment in Gold) कितना सही है और आने वाले एक साल में यह कहां तक पहुंच सकता है? इसका जवाब दे रहे हैं केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया. आइए गोल्ड के फ्यूचर को जानने की कोशिश करते हैं.
अजय केडिया ने कहा कि गोल्ड की कीमत कुछ महत्वपूर्ण फैक्टर्स से प्रभावित होती है. मंदी का खतरा बढ़ रहा है जो सोने के लिए अच्छा है. महंगाई कम होने का नाम नहीं ले रही है जो गोल्ड रेट (Gold rate today) के लिए सपोर्टिव है. जियो पॉलिटिकल सिचुएशन गंभीर है. एक तरफ यूक्रेन पर रूस के हमले को छह महीने गुजर गए. दूसरी तरफ ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनातनी है. अनिश्चितता की स्थिति में सोने की कीमत में तेजी आएगी.
डॉलर इंडेक्स इस समय 109 के स्तर पर है. डॉलर में यह बहुत बड़ी तेजी है. जब तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व इंट्रेस्ट रेट बढ़ाने को लेकर अग्रेसिव रहेगा, डॉलर में मजबूती बनी रहेगी. जैसे ही उसका रुख नरम होगा, डॉलर में गिरावट आएगी और फिर सोने में तेजी का ट्रेंड दिखेगा.
अजय केडिया का मानना है कि जब डॉलर स्थिर होगा तो 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस की तर्ज पर सोने में बड़ा उछाल आएगा. उस फाइनेंशियल क्राइसिस में छह महीने तक सोना स्थिर रहा. उसके बाद सितंबर 2008 से जो सोने में तेजी का सिलसिला शुरू हुआ वह अप्रैल 2011 तक चला. इस तेजी में इंटरनेशनल मार्केट में सोना 650 डॉलर से 1920 डॉलर प्रति आउंस के स्तर तक पहुंच गया था.
उनका कहना है कि डॉलर जब स्थिर होगा तो एकबार फिर से सोने में इसी तरह का उछाल देखने को मिल सकता है. अगले एक साल की बात करें तो डोमेस्टिक मार्केट में सोना फिर से 56000 रुपए प्रति दस ग्राम का स्तर छू सकता है. हालांकि, अगले 2 साल में सोना 60 हजार रुपए के स्तर तक पहुंच सकता है. लंबी अवधि के लिए महंगाई का दबाव रहेगा, ऐसे में डॉलर में भी मजबूती कायम रहेगी. इसलिए एक साल तक सोने में बड़े मूवमेंट की कम संभावना है. उसके बाद का मूवमेंट तेज होगा.
अजय केडिया के मुताबिक, गोल्ड-सिल्वर रेश्यो घटकर 90 के करीब है. अगर यह रेश्यो घटता है तो आने वाले समय में सोना के मुकाबले चांदी का मूवमेंट और ज्यादा तेज और बड़ा होगा. मौजूदा वक्त में सोने के ट्रेंड को लेकर एक्सपर्ट का मानना है कि जब आर्थिक मंदी की संभावना बनती है और महंगाई कम रहती है तो सोने की मांग ज्यादा रहती है. यह एक ऐसा निवेश है जिसमें इंट्रेस्ट नहीं आता है. यही वजह है कि आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद सोने की मांग लिमिटेड है. लेकिन, सोना अपना हाई बना सकता है.