FY25 में रियल GDP ग्रोथ 7% के करीब रहने का अनुमान, 2030 तक 7 लाख करोड़ डॉलर की होगी अर्थव्यवस्था

Indian Economy Review: FY25 में रियल जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) 7% के करीब रह सकती है. वहीं, भारतीय अर्थव्यस्था (Indian Economy) साल 2030 तक 7 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी.
FY25 में रियल GDP ग्रोथ 7% के करीब रहने का अनुमान, 2030 तक 7 लाख करोड़ डॉलर की होगी अर्थव्यवस्था

Indian Economy Review: वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने बजट (Budget 2024) से पहले आर्थिक समीक्षा पेश की. डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स की आर्थिक समीक्षा में उम्मीद जताई गई है कि FY25 में रियल जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) 7% के करीब रह सकती है. वहीं, भारतीय अर्थव्यस्था (Indian Economy) साल 2030 तक 7 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी. सोमवार को पेश की गई समीक्षा में पिछले 10 साल में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की तुलना सामने रखी गई है.

FY25 में रियल GDP ग्रोथ 7% रहने का अनुमान

वित्त मंत्रालय की समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत फाइनेंशियल सेक्टर, स्ट्रक्चरल रिफॉर्म के चलते जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी से ज्यादा रहने का अनुमान जताया गया है. हालांकि, ग्लोबल विवादों से अर्थव्यवस्था पर जोखिम बढ़ रहा है. महंगाई दर घटकर 4% के करीब आ रही है. कैपेक्स फंडिंग में फाइनेंशियल मार्केट की अहम भूमिका होगी. FY24 में भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार तीसरे साल 7 फीसदी से बढ़ी है. इस दौरान ग्लोबल इकोनॉमी 3% से ज्यादा ग्रोथ के लिए संघर्ष कर रही है.

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आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तैयार 'The Indian Economy- A Review' अंतरिम बजट पेश होने से कुछ दिन पहले जारी की गई है. आर्थिक समीक्षा में अनुमान दिया गया है कि अगले 3 साल में भारतीय अर्थव्यवस्था 5 लाख करोड़ डॉलर का स्तर पार कर लेगी. जबकि 2030 तक अर्थव्यवस्था 7 लाख करोड़ डॉलर का स्तर पार कर सकती है.

क्या है समीक्षा में खास बातें

मुख्य आर्थिक सलाहकार, वी अनंत नागेश्वरन के मुताबिक, अब यह बहुत संभावना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2023-24 में 7 फीसदी या उससे अधिक की ग्रोथ रेट हासिल करेगी और कुछ का अनुमान है कि यह एक और वर्ष FY25 में भी 7 फीसदी रियल ग्रोथ हासिल कर लेगी.

मिनी आर्थिक सर्वेक्षण मानी जा रही इस रिपोर्ट में सभी सकारात्मक विकास और चुनौतियों पर ध्यान दिया गया. इसमें स्किल डेवलपमेंट, हेल्थ, ऊर्जा सुरक्षा, एमएसएमई (MSME) के लिए अनुपालन बोझ में कमी और श्रम बल में लिंग संतुलन को भविष्य के सुधारों के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

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