Success Story: कोरोना काल के दौरान लाखों लोगों की नौकरियां छूट गई थीं और कइयों ने नौकरी छोड़कर अपने गांव लौटने का फैसला किया. ऐसे ही बिहार के प्रदीप गुप्ता, एक प्रगतिशील किसान ने कोरोना महामारी के दौरान प्राइवेट नौकरी छड़कर खेती की ओर रुख किया.
1/5प्रखंड के कृषि तकनीकी प्रबंधक (ATM) और ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक (BTM) से मखाना की खेती की जानकारी लेने के बाद, उन्होंने अपनी जमीन पर और लीज पर ली गई जमीन पर मखाना की खेती शुरू की.
2/5आज वे मखाना की खेती से सालाना 10 से 15 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं. उनकी मेहनत ने न केवल उनके जीवन स्तर को सुधारने में मदद की है, बल्कि ये आसपास के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बने हैं.
3/5मिथिला मखाना को दिसंबर 2021 में GI टैग मिला. भारत के कुल मखाना उत्पादन में बिहार का 90% योगदान है. मखाना प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर, एक सुपरफूड माना जाता है. मखाना तालाबों और उथले जल निकायों में उगाया जाता है, जो इसके विशेष स्वाद और बनावट का कारण है.
4/5भारत के कुल मखाना उत्पादन में 90% योगदान बिहार का है, जो प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर इस सुपरफूड को दुनिया तक पहुंचाता है.
5/5मखाने की खेती के लिए ज्यादातर तालाबों या तालों में किया जाता है, लेकिन इसके अभाव में मखाना की खेती खेत में भी किया जा सकता है, जिसके लिए खेत में 6 से लेकर 9 इंच तक पानी जमा होने की व्यवस्था करनी होती हैं. आप चाहे तो खुद से भी एक तालाब तैयार कर मखाने के बीज की रोपाई कर सकते हैं. बीजारोपण से पहले तालाब के पानी से खरपतवार निकाल लेते है.