Madua ki Kheti: मडुआ को भारत में रागी और नेपाल में कोदो के नाम से जाना जाता है. इसका इस्तेमाल अनाज के रूप में होता है. यह न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि बहुत पौष्टिक भी होता है. यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत है. मडुआ (Madua), खेती में किसानों को कम लागत और अच्छी कीमत मिलती है. ऐसे में मडुआ (Ragi) की खेती किसानों के लिए फायदेमंद है. (Image- ICAR)
1/5मडुआ (Ragi) का सपोर्ट प्राइस अच्छा है. प्रोटीन की अच्छी और सस्ती सप्लाई का स्रोत है. सूखे के लिए अच्छा प्रतिरोधी है. कटाई के दौरान कम उर्वरकों (Fertilisers) का इस्तेमाल किया जाता है. खेती की लागत कम है. सिंचाई की ज्यादा जरूरत नहीं है. (Image- ICAR)
2/5मडुआ (Ragi) का सपोर्ट प्राइस अच्छा है. प्रोटीन की अच्छी और सस्ती सप्लाई का स्रोत है. सूखे के लिए अच्छा प्रतिरोधी है. कटाई के दौरान कम उर्वरकों (Fertilisers) का इस्तेमाल किया जाता है. खेती की लागत कम है. सिंचाई की ज्यादा जरूरत नहीं है. (Image- ICAR)
3/5मडुआ की 4.5-8 पीएच वाली मृदा में सबसे अच्छी उपज दर्ज की गई है. इसे शुष्क मौस में भी उगाया जा सकता है और यह गंभीर सूखे की स्थिति का सामना करने में सक्षम है. इसे पूरे वर्ष आसानी से उगाया जा सकता है. यह सभी छोटे मिलेट (Millet) के बीच अत्यधिक उगाई जाने वाली फसल है. (Image- Freepik)
4/5देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए इसकी कई लोकप्रिय किस्में जारी की गई हैं. वीएल मुडआ 101, वीएल मुडआ 204, वीएल 124, वीएल 149, वीएल 146, वीएल मडुआ 315 (105-115 दिनों में परिपक्वता) और वीएल मडुआ 324 (105-135 दिनों में परिपक्वता). (Image- Freepik)
5/5मडुआ की रोटी में कैल्शियम की मात्रा ज्यादा होती है और इसमें बहुत सारा फाइबर होता है. इसमें एक अमीनो अम्ल मेथिनोनीन भी होता है जो एक प्रोटीन घटक है. लगभग 100 ग्राम खपत पर यह 340 कि ग्रा कैलोरी ऊर्जा प्रदान करता है. इसे हरेक मौस में खाया जा सकता है. सर्दियों के मौस में इसका इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद फायदेमंद रहता है. (Image- Freepik)