गर्मी के दिनों में बाजारों में लीची की बहुत अधिक मांग रहती है. लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. बिहार के बागवानों के लिए बिहार कृषि विभाग ने अप्रैल महीने में लीची के पौधे में किए जाने वाले कामों की एडवाइजरी जारी की है.
1/9लीची की शाही किस्म में फल लग चुके हैं अगर फल लौंग के आकार ले चुके हैं तो बागान से मधुमक्खी के बक्सों को हटा दें. चाइना किस्म में अगर फल नहीं लगे हो तो मधुमक्खी के बक्सों को फल लगने तक बाग में ही रहने दें. अगर फल लग चुके हैं तो मधुममक्खी के बक्सों को हटा दें. (Image- Freepik)
2/9फलों के लौंग का आकार होने पर बाग में हल्की सिंचाई करें. (Image- Freepik)
3/9फल लौंग के आकार होने पर 8-12 वर्षों के पौधों में 350 ग्राम यूरिया और 250 ग्राम पोटेशियम सल्फेट का व्यवहार करें और 15 वर्ष के ऊपर के पौधों में 450-500 ग्राम यूरिया और 300 से 350 ग्राम पोटेशियम सल्फेट का इस्तेमाल करें. ध्यान रहे कि उर्वरकों का इस्तेमाल पर्याप्त नमी होने पर ही करें. छत्रक से 1 मीटर अंदर 15 सेमी चौड़ी और गहरी नाली बनाकर उर्वरकों का इस्तेमाल करें. (Image- Freepik)
4/9मंजर/फल झुलसा और अन्य रोग से बचाव के लिए कवकनाशी थायोफेनेट मिथाइल 70% डब्ल्यूपी 2 ग्राम प्रति लीटर का छिड़काव करें. कवकनाशी दवा को कीटनाशी दवा के साथ मिलाकर छिड़काव नहीं करें. (Image- Freepik)
5/9कीटनाशक दवा का छिड़काव कवक नाशी दवा के छिड़काव के दो दिन बाद ही करें. लीची फल बेधक (बोरर) कीट से बचाव के लिए थीयाक्लोप्रिड (21% एस.सी) 0.6 मिली प्रति लीटर पानी अथवा इमारेक्टिन बेनजोएट (0.5 मिली प्रति लीटर) + फिप्रोनील (1.5 मिली प्रति लीटर) दवा का घोल बनाकर छिड़काव करें. ध्यान रखें कि दवा का छिड़काव फलों के लौंग के आकार के हो जाने के बाद ही करें. (Image- Freepik)
6/9फलों को झड़ने से रोकने के लिए फल लगने के 7-10 दिन बाद प्लानोफिक्स 1.0 लीटर प्रति 4.5 लीटर पानी में या एन.ए.ए. 20 पीपीएम (20 मिली ग्राम प्रति लीटर) का घोल बनाकर छिड़काव करें. 15 दिन के बाद दूसरा छिड़काव करें. (Image- Freepik)
7/9फलों को फटने की समस्या से रोकने के लिए फल लौंग के आकार के हो गए हैं तो पौधों में बोरेक्स (20%) अथवा जल में घुलनशील बोरॉन का 4 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. बोरेक्स की सही मात्रा का उपयोग करें, अन्यथा नुकसान हो सकता है. (Image- Freepik)
8/9बेहतर गुणवत्ता के फल पाने के लिए फल लगने के 20-25 दिन बाद गुलाबी/सफेद रंग के नॉनवुवन पॉली प्रोपाइलीन बैंग से गुच्छों को ढंक दें (लीची के गुच्छों का थैलीकरण करें). (Image- Freepik)
9/9फलों के पकने तक सिंचाई का समुचित प्रबंध कर बाग में नमी बनाए रखें. अधिक जानकारी के लिए किसान भाई राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुशहरी, मुजफ्फरपुर में खुद जाकर या टेलीफोन से संपर्क करके लीची से संबंधित जानकारी ले सकते हैं. (Image- Freepik)