Cotton Cultivation: कपास (Cotton) की खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ी खबर है. कपास की फसल पर सफेद मक्खी, हरा तेला और थ्रिक्स का प्रकोप बढ़ा है. इसे देखते हुए हरियाणा सरकार (Haryana Government) ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. (Image- Pixabay)
1/6हरियाणा सरकार ने अगस्त माह में कपास की खेती को रोगों और कीटों से बचाने के लिए किसानों सुझाव दिए हैं. इसके मुताबिक, कपास की फसल में रस चूने वाले कीटों की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 20 पौधों की तीन पत्तियों पर सफेद मक्खी, हरा तेल और थ्रिप्स (चूरड़ा) की गिनती एक हफ्ते अंतर पर करें. (Image- Pixabay)
2/6हरा तेला का प्रपोत होने पर 40 मिलीलीटर इमिडाइक्लोप्रिड (कॉन्फीडोर) 200 एस.एल या 40 ग्राम थायामिथॉक्सान (एकतारा) 25 डब्ल्यू.जी को 150 से 175 लीटर पानीर में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें. (Image- Pixabay)
3/6सफेद मक्खी के आर्थिक कगार पर पहुंचने पर 300 मिलीलीटर डाईमेथोएट (रोगोर) 30 ई.सी/ ऑक्सीडेमेटोन मिथाइल (मेटासिस्टोक्स) 25 ई.सी के साथ 1 लीटर नीम आधारित कीटनाशक (नीमबीसीडीन / अचूक) या 400 मिलीलीटर पाइरिप्रोक्सिफेन (डायटा) 10 ई.सी या 240 मिलीलीटर स्पिरोमेसिन (ओबेरोन) 22.9 एस.सी. को 200 से 250 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से 10 से 12 दिनों के अंतराल पर जरूरत के अनुसार बारी-बारी से छिड़काव करें. (Image- Pixabay)
4/6पाइरिप्रोक्सिन व स्पिरोमेसिफेन सफेद मक्खी की शिशु (निम्फ) अवस्था के प्रति काफी प्रभावी हैं. हरा तेला और सफेद मक्खी का प्रकोप होने पर फ्लोनिकामिड (उलाला) 50 घु.द. की 60 ग्राम मात्रा या एफिडोपयोपेन (सेफिना) 50 डीसी की 400 मिलीलीटर मात्रा को 200 लीटर पानी की दर से प्रति एकड़ स्प्रे करें. (Image- Pixabay)
5/6जुलाई के अंतिम हफ्ते में अच्छी बारिश होने से चिप्स का प्रकोप कम हुआ है. अगस्त माह में हरा तेला और सफेद मक्खी की बढ़ने की संभावना है. पिछले हफ्ते किए गए सर्वे में हरा तेला का प्रकोप काफी खेतों में पाया गया है. (Image- Pixabay)
6/6कपास की फसल में थ्रिप्स का प्रकोप होने पर पर 250 से 350 मिलीलीटर डाईमेथोएट (रोगोर) 30 ई.सी या 300 से 400 मिलीलीटर ऑक्सीडेमेटोन मिथाइल (मेटासिस्टॉक्स) 25 ई.सी को 150 से 175 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें. (Image- Pixabay)