सूरजमुखी के MSP पर खरीद को लेकर लामबंद हुए किसान, कुरुक्षेत्र के शाहबाद में नेशनल हाईवे किया जाम

Sunflower MSP: प्रदर्शनकारी किसानों ने दावा किया कि सरकार एमएसपी पर सूरजमुखी बीज नहीं खरीद रही है और इसके चलते उन्हें अपनी उपज निजी खरीदारों को 6,400 रुपये एमएसपी के मुकाबले लगभग 4,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
सूरजमुखी के MSP पर खरीद को लेकर लामबंद हुए किसान, कुरुक्षेत्र के शाहबाद में नेशनल हाईवे किया जाम

(Image- Freepik)

Sunflower MSP: बड़ी संख्या में किसानों ने कुरुक्षेत्र के शाहबाद के पास नेशनल हाईवे को जाम कर दिया. किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सूरजमुखी बीज की खरीद करे. बीकेयू (चारुनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चारुनी के आह्वान पर किसानों ने शाहबाद के पास दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे को जाम कर दिया. प्रदर्शनकारी किसानों ने दावा किया कि सरकार एमएसपी पर सूरजमुखी बीज नहीं खरीद रही है और इसके चलते उन्हें अपनी उपज निजी खरीदारों को 6,400 रुपये एमएसपी के मुकाबले लगभग 4,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

चारूनी ने कहा कि सरकार को सूरजमुखी बीजों की खरीद 6,400 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करनी चाहिए. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने सरकार को सोमवार तक का समय दिया था, लेकिन उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया. प्रदर्शनकारियों द्वारा राजमार्ग जाम किए जाने के बाद पुलिस को यातायात को अन्य मार्गों और संपर्क मार्गों के लिए मोड़ना पड़ा. जिस जगह पर किसानों ने राजमार्ग जाम किया था, उसके पास भारी पुलिस बल तैनात था.

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चारुनी ने धरना स्थल पर संवाददाताओं से कहा, जब तक सरकार हमारी मांग नहीं मानती, हमारा विरोध जारी रहेगा. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे भावांतर भरपाई योजना में सूरजमुखी के बीज को शामिल करने के सरकार के कदम के खिलाफ हैं. इसके तहत सरकार एमएसपी से नीचे बेची गई उपज के लिए 1,000 रुपये प्रति क्विंटल का निश्चित मुआवजा देगी. उन्होंने मांग की कि सूरजमुखी के बीज की एमएसपी पर खरीद की जाए.

सूरजमुखी के मुद्दे पर विपक्षी कांग्रेस ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हाल ही में कहा था, सूरजमुखी के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य का इंतजार कर रहे हैं और निजी व्यापारियों को अपनी उपज बेचकर किसानों को 1,500 से 2,500 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है.

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