मोदी सरकार का प्रस्ताव- शीशम की खेती करने वालों का फायदा, एक्सपोर्ट से बढ़ेगी आमदनी

शीशम की लकड़ी को फर्नीचर, दरवाजे और दूसरे सामान बनाने के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है, लेकिन शीशम की लकड़ी से बने सामनों के इंटरनेशनल ट्रेड पर रोक के चलते भारतीय किसानों को शीशम की खेती का पूरा फायदा नहीं मिल पाता.
मोदी सरकार का प्रस्ताव- शीशम की खेती करने वालों का फायदा, एक्सपोर्ट से बढ़ेगी आमदनी

शीशम के कारोबार पर 2016 में बैन लगाया गया था (फोटो- बिहार सरकार).

शीशम की लकड़ी को फर्नीचर, दरवाजे और दूसरे सामान बनाने के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है, लेकिन शीशम की लकड़ी से बने सामनों के इंटरनेशनल ट्रेड पर रोक के चलते भारतीय किसानों को शीशम की खेती का पूरा फायदा नहीं मिल पाता. ऐसे में मोदी सरकार के नए प्रस्ताव से उनकी आमदानी कई गुना बढ़ सकती है, जिसमें शीशम की लकड़ी से बने सामान के कारोबार पर लगे बैन को हटाने की बात की गई है. दरअसल इंटरनेशनल ट्रेड एग्रीमेंट (साइट्स) के तहत दुर्लभ जानवरों और पेड़-पौधों के कारोबार पर प्रतिबंध लगाया गया है. इसके तहत ही शीशम की लकड़ी से बने सामान पर भी बैन है. भारत का कहना है कि शीशम के पेड़ देश में बहुत अधिक संख्या में मौजूद हैं, इसलिए उस पर लगे बैन को हटा देना चाहिए.

कॉमर्स मिनिस्ट्री के तहत आने वाले हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईपीसीएच) ने एक बयान में कहा कि पर्यावरण, जंगल और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने साइट्स को एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें डालबर्गिया सिसो या शीशम पर बैन हटाने की बात कही गई है. साइट्स के परिशिष्ट- II के तहत शीशम की लकड़ी से बने सामानों के इंटरनेशनल ट्रेड पर बैन है.

बयान में कहा गया है कि जिनेवा में कॉप 18 की बैठक में शीशम के व्यापार के महत्व पर चर्चा की गई थी. इस बारे में फैसला कर शीशम पर बैन हटा देना चाहिए. शीशम के कारोबार पर 2016 में बैन लगाया गया था.

ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार ने बोटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया के सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि शीशम के पेड़ों पर अस्तित्व का खतरा नहीं है और यह जंगलों और खेतों में बहुतायत में उपलब्ध है. इसलिए शीशम को परिशिष्ट- II से हटाने का प्रस्ताव साइट्स के पास भेजा गया है. ईपीसीएच ने कहा कि यह प्रस्ताव नेपाल, भूटान और बांग्लादेश सहित पूरे साउथ एशिया के कारीगरों और किसानों के हित में है.

इस बारे में जेनेवा में चल रही साइट्स की बैठक में विचार किया जाएगा. यह बैठक 17 अगस्त को शुरू हुई और 28 अगस्त तक चलेगी. भारत से लकड़ी की कलात्मक वस्तुओं का निर्यात वर्ष 2018-19 के दौरान 5,424.91 करोड़ रुपये का रहा जो एक साल पहले से 27.13 प्रतिशत अधिक है.

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