मकान खरीदने के लिए अक्सर लोग होम लोन लेते हैं. होम लोन लंबे समय का कर्ज है, ऐसे में हर महीने इसकी भारी-भरकम ईएमआई चुकाना आसान नहीं होता. EMI चुकाते-चुकाते तमाम लोगों का घर का बजट गड़बड़ाने लगता है. अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ है, तो परेशान न हों. यहां जानिए वो Smart Tricks जिनसे आप अपनी ईएमआई को कम कर सकते हैं.
1/5EMI को छोटा करने का सबसे आसान तरीका तो ये है कि आप लोन टेन्योर बढ़ा दें. लोन की अवधि बढ़ने से आपके ईएमआई छोटी हो जाती है. हालांकि इसमें एक घाटा यह होगा कि आपको ब्याज ज्यादा देना पड़ जाएगा. लेकिन ज्यादा ईएमआई के चलते जो आपके रोज के बजट पर असर पड़ रहा था, उसमें आपको राहत मिल जाएगी.
2/5दूसरा तरीका है लोन ट्रांसफर. अगर आपको होम लोन चुकाते हुए कुछ साल हो गए हैं और आपका री-पेमेंट रिकॉर्ड अच्छा है, तो आप अपना लोन दूसरे बैंक में ट्रांसफर भी करवा सकते हैं. इसे होम लोन बैलेंस ट्रांसफर कहते हैं. ऐसे में नए बैंक में आपको कम ब्याज दरों के साथ लोन मिल सकता है. हालांकि, लोन ट्रांसफर करने से पहले प्रोसेसिंग फीस और फोरक्लोजर फीस वगैरह का पता कर लें.
3/5होम लोन प्रीपेमेंट भी बहुत अच्छा ऑप्शन है. जब भी आपके पास एक्सट्रा पैसा आए, तो आप प्रीपेमेंट कर अपनी लोन की EMI घटा सकते हैं. दरअसल, जब भी आप प्रीपेमेंट करते हैं, तो वह रकम सीधे प्रिंसिपल अमाउंट से कम होती है. इस तरह आपकी मंथली किस्त भी कम हो जाती है. लोन के शुरुआती दौर में प्रीपेमेंट से जहां ईएमआई कम होती है, वहीं ब्याज भी बचता है.
4/5अगर आपकी आमदनी बेहतर है और आप लोन की ईएमआई के चक्कर से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको अपने होम लोन को रीस्ट्रक्चर करवा लेना चाहिए. ऐसे में आपकोअपनी ईएमआई बढ़वा लेनी चाहिए, ताकि लोन चुकाने की अवधि कम हो सके. इससे आपको फायदा ये होगा कि आपको कम ब्याज चुकाना होगा. साथ ही आपका होम लोन से भी जल्दी छुटकारा पा लेंगे.
5/5अगर आप होम लोन लेने की सोच रहे हैं तो ईएमआई इतनी भी ज्यादा ना बढ़वा लें कि आपको उसे चुकाने में दिक्कत हो. आम तौर पर होम लोन की एमआई आपकी इनहैंड सैलरी के 20-25 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अगर आप अकेले हैं और कोई जिम्मेदारी नहीं है तो शुरुआती दौर में आप 30-35 फीसदी तक के बराबर ईएमआई रख सकते हैं, लेकिन उससे ज्यादा ना रखें. जब जिम्मेदारियां बढ़ें तो अपने होम लोन की रीस्ट्रक्चर करवा लें, जिससे आप अपनी सहूलियत से लोन का भुगतान कर सकें.