ऐसे कई सारे केस सामने आए हैं, जिनमें बैंक आपकी सहायता को प्राथमिकता न देकर खुद की सहायता करने लगते हैं. आपको लगता है कि आपकी मदद की जिम्मेदारी बैंक की है? बिल्कुल सही, बैंक आपकी मदद के लिए ही हैं. लेकिन, वो सिर्फ आपकी मदद नहीं करते खुद की भी करते हैं? बैंक की तरफ से कई सारी ऐसी जानकारियां छुपा ली जाती हैं, जो आपको पता होनी चाहिए.
1/5अगर हम कार्ड के चोरी होने या खोने की बात करते हैं तो आपको बता दें कि आपके डेबिट कार्ड से ज्यादा सुरक्षित आपका क्रेडिट कार्ड है. कोई भी बैंक आपको इस बारे में नहीं बताएगा. अपने बैंकर से बात करके अपने कार्ड के खोने या चोरी होने की स्थिति में सुरक्षा की जानकारी लें. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) एक क्रेडिट कार्ड प्रोटेक्शन प्लान (CPP) देता है, जो इस तरह की परिस्थितियों में आपके लिए मददगार होता है. अपने बैंक से पता करें कि क्या उनके पास भी ऐसी कोई स्कीम है? इस तरह से आप अपने कार्ड को ज्यादा सुरक्षित कर सकते हैं.
2/5दूसरे ऑर्गेनाइजेशन की तरह बैंक में भी लॉयल और पुराने ग्राहकों को ज्यादा प्रिविलेज दी जाती है. लेकिन, अक्सर बैंक इस तरह की कोई जानकारी अपने ग्राहकों को नहीं बताते हैं. आपको इसके बारे में खुद ही पूछना पड़ेगा. अगर इसकी बात की जाए तो आमतौर पर बैंक अपने पुराने ग्राहकों को फीस वेवर दे देते हैं, तो आप भी इसके लिए बात कर सकते हैं.
3/5एटीएम ट्रांजेक्शन की हर रसीद संभाल कर रखनी चाहिए, क्योंकि एटीएम एक ऑटोमेटेड प्रॉसेस है. जिस सॉफ्टवेयर के जरिए यह प्रक्रिया काम करती है, वह कुछ गलतियां कर सकता है. इसकी वजह से कई सारी ट्रांजेक्शन डुप्लिकेट बन जाती है. अगर आपके पास रसीद नहीं है तो ये साबित करना मुश्किल होगा कि ट्रांजेक्शन डुप्लिकेट है. ऐसी स्थिति में एटीएम ट्रांजेक्शन की हर रसीद काम आती है. वक्त पढ़ने पर आप इन रसीद को बैंक को दिखा भी सकते हैं.
4/5आमतौर पर बैंक कई तरह के अकाउंट ऑफर करते हैं. कुछ अकाउंट ऐसे होते हैं, जिनमें ज्यादा ब्याज का फायदा मिलता है. ऐसे में कोई बैंक आपको उनके बारे में बताए यह जरूरी नहीं है. बैंक में कितने तरह के अकाउंट हैं और किसमें आपको ज्यादा फायदा होगा, इसका पता आपको खुद ही लगाना होगा. इसलिए ज्यादा रिटर्न कमाना चाहते हैं तो पहले पता कर लें कि किस अकाउंट पर ज्यादा ब्याज मिलता है, तभी अकाउंट खोलें.
5/5किसी भी डॉक्युमेंट के साइन करने से पहले सही से पढ़ लें. इसमें आपको कई सारे ऐसे शब्द मिल सकते हैं, जिनके आपको मतलब भी न पता हों. ऐसे शब्दों की अनदेखी करने के बजाए उनका मतलब पूछें. डॉक्युमेंट को साइन करने से पहले सभी शब्दों के अर्थ को अच्छे से समझ लें, वरना आपको नुकसान भी हो सकता है. हालांकि, इसमें आपका और बैंक अधिकारी का बहुत सारा समय जा सकता है, लेकिन भविष्य में आपको ही इसका फायदा होगा.