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Tax on passenger vehicles in India: ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरिंग कंपनी निसान मोटर इंडिया (NISSAN Motor India) के प्रबंध निदेशक राकेश श्रीवास्तव ने मंगलवार को कहा कि भारत को स्वच्छ वातावरण के लिए गाड़ियों की लंबाई और इंजन के आकार के बजाय उत्सर्जन के आधार पर यात्री वाहनों यानी पैसेंजर व्हीकल्स (पीवी) पर टैक्स (tax on car) लगाने के बारे में सोचना चाहिए. भाषा की खबर के मुताबिक, श्रीवास्तव ने कहा कि गाड़ियों (passenger vehicles) के जरिये फैलने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए हाइब्रिड जैसी टेक्नोलॉजी पर भी विचार किया जाना चाहिए. श्रीवास्तव ने यहां एक बातचीत में कहा कि हम उत्सर्जन के लेवल के आधार पर अलग-अलग कर स्लैब रख सकते हैं.
खबर के मुताबिक, श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार पहले से ही चार मीटर से कम लंबी, चार मीटर से ज्यादा लंबी गाड़ियों और अलग-अलग ईंधन के आधार पर अलग-अलग टैक्स ढांचा लागू करती है. जीएसटी व्यवस्था के तहत, कारों (Tax on passenger vehicles) पर 28 प्रतिशत का मैक्सिमम टैक्स स्लैब लगता है. इसके अलावा उसके ऊपर एक उपकर (सेस) लगाया जाता है. साथ ही, देश में हाइब्रिड गाड़ियों पर जीएसटी समेत कुल टैक्स 43 प्रतिशत है, जबकि बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर करीब पांच प्रतिशत का टैक्स लगता है.
श्रीवास्तव ने कहा कि मुझे लगता है कि उत्सर्जन लेवल (emissions based tax on Car) के आधार पर बाजार में प्रोत्साहन की ओर ध्यान दिया जाए, जिससे एक स्वच्छ और हरित वातावरण हो सके. इसके साथ ही निसान एक्स-ट्रेल समेत अपने वैश्विक स्पोर्ट्स यूटिलिटी वाहनों (एसयूवी) को भारतीय बाजार में उतारने की भी योजना बना रही है. निसान इंडिया के अध्यक्ष फ्रैंक टॉरेस ने कहा कि कंपनी देश में अपनी मौजूदगी को मजबूत करना चाहती है.
कंपनी देश में एक्स-ट्रेल, ज्यूक और कश्काई जैसे मॉडलों को उतारना चाहती है. कंपनी (NISSAN Motor India) फिलहाल देश में मैग्नाइट और किक्स जैसे मॉडल बेचती है. भारतीय सड़कों पर एक्स-ट्रेल और कश्काई के लिए टेस्टिंग शुरू हो चुका है. टॉरेस ने कहा कि भारतीय बाजार में असीम संभावनाएं हैं. यह महत्वपूर्ण है कि हम आधुनिक भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों के मुताबिक सबसे बेस्ट कारें पेश करें. उन्होंने कहा कि भारत में मैग्नाइट की सफलता के बाद अब कंपनी की एसयूवी पर ध्यान केंद्रित करने और अपनी विशेषज्ञता का लाभ उठाने की योजना है.