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Delhi Weather Study: दिल्ली में गर्मी पिछले 20 सालों में सबसे तेजी से बढ़ रही है.अब दिल्ली की रातें भी गर्म होती जा रही हैं. सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट की स्टडी में ये बड़ा खुलासा हुआ है. दिल्ली का बढ़ता तापमान जानलेवा होता जा रहा है. स्टडी के मुताबिक क्लाइमेट चेंज ने दिल्ली के औसत तापमान को इतना बढ़ा दिया है कि अब सर्दी के मौसम की शुरुआत के बाद भी रात को भी तापमान नीचे नहीं जा पा रहा है. 2011 से दिल्ली के औसत तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ लेकिन नमी लगातार बढ़ी है.
सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट की स्टडी के मुताबिक 2022 पिछले 12 सालों में सबसे गर्म साल रहा है. इस वर्ष गर्मी का औसत तापमान 31.2°C रहा है. जबकि 2023 में औसत तापमान 28.9°C दर्ज हुआ है. इस साल बेमौसम बारिश ने गर्मी को थोड़ा काबू में रखा है. 2001-10 से पिछले 10 सालों की तुलना करें तो दिल्ली का औसत तापमान कम हुआ लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि गर्मी कम हो रही है. बेमौसम बारिशों से नमी में लगातार इजाफा हो रहा है.
साल 2023 में मार्च से मई के महीने में नमी का औसत 49.1% रहा है. 2001 से 2010 के बीच के नमी के औसत से ये 21% ज्यादा है. मॉनसून में नमी 73% रही जो पिछले दस सालों के औसत से 14% ज्यादा है. नमी पर आधारित हीट इंडेक्स के मुताबिक 41°C का हीट इंडेक्स इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. पिछले दस सालों में तेज गर्मी वाले दिन कम हुए हैं लेकिन नमी वाले दिन और नमी का स्तर दोनों बढ़े हैं. ये हीट इंडेक्स को बढ़ा रहे हैं. 2023 में 40°C से ज्यादा तापमान वाले दिन केवल 17 ही रहे हैं जबकि 2001 से 2010 का औसत 46 दिनों का है. .
2020 में हीट इंडेक्स यानी गर्मी कितनी महसूस हो रही है इस स्तर को खतरनाक स्तर पर रखने वाले दिनों की संख्या सबसे ज्यादा 32 दिनों की रही. हीट इंडेक्स 41°C से ज्यादा को एक्सपर्टस खतरनाक मानते हैं. इस वर्ष ऐसे दिनों की संख्या 14 रही है. मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि इस वर्ष मार्च से मई की तुलना में मॉनसून वाले वक्त ने लोगों को ज्यादा गर्मी का अहसास करवाया है. इस वर्ष मॉनसून ने गर्मी के अहसास को असल तापमान से 6.7°C ज्यादा बढ़ाया.
असल दिकक्त ये है कि दिल्ली में गर्मियों की रातें भी ठंडी नहीं हुई. साल 2001 से 2010 के बीच दिन के मुकाबले रात का तापमान 14.3°C तक कम हो जाता था लेकिन 2023 में ये केवल 12.3°C ही नीचे आया. मॉनसून के वक्त में ये फर्क और कम हो गया. रात के वक्त तापमान में 7.5°C डिग्री की ही गिरावट आई. एयरकंडीशनर्स लंबे समय तक चल रहे हैं जिससे एक तरफ दिल्ली की बिजली की डिमांड लगातार बढ़ रही है और दूसरी तरफ एसी से बाहर निकलने वाली हीट तापमान को लगातार गर्म बनाए हुए हैं.
2018 के बाद दिल्ली में मॉनसून के दौरान सबसे ज्यादा बिजली की डिमांड इस वर्ष रही है. दिल्ली की हवा में नमी का स्तर पहले से ज्यादा और लंबे समय के लिए बना हुआ है जो गर्मी में 5-7°C की बढ़ोतरी कर रहा है. इस बार मॉनसून के सीजन में 40 प्रतिशत बिजली की डिमांड बढ़ी हुई थी. अनुमान के मुताबिक अगर तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी हो तो दिन में 140-150 MW और रात में 190-200 MW बिजली की डिमांड ज्यादा बढ़ जाती है.
दिल्ली में बनते जा रहे अर्बन हीट आईलैंड लोकल स्तर पर तापमान में 2°C की बढ़ोतरी कर देते हैं. सीएसई की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, रिसर्च अनुमिता रॉय चौधरी के मुताबिक लगातार बढ़ रही गर्मी बीमारियों का बोझ बढ़ा रही है. इस स्टडी को करने के लिए दिल्ली के तापमान को दो हिस्सों में देखा गया. मार्च से मई और जून से अगस्त यानी मॉनसून से पहले और बारिशों के दौरान.
सेंटर फार साइंस के रिसर्चर्स के मुताबिक शहर की खुद को ठंडा कर पाने की क्षमता में 12 से 21 प्रतिशत की कमी आ गई है. पिछले छह वर्षों में दिल्ली की बिजली डिमांड मॉनसून में ज्यादा रही है. 22 डिग्री के बाद तापमान में हर एक डिग्री के इजाफे का मतलब है कि हर डिग्री के साथ 140-150 MW की बिजली की डिमांड बढ़ जाती है. रात में ये डिमांड 22 डिग्री के बाद हर एक डिग्री तापमान बढ़ने पर 190-200 MW ज्यादा हो रही है. पिछले 6 सालों में 194 रातों में बिजली की डिमांड पीक पर रही है.
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एक्सपर्टस ने ऐसे समाधान सुझाए हैं जिसे दिल्ली में कागजों पर ही लागू किया जा सकता है. सीएसई के मुताबिक-दिल्ली को गर्मी के लिए एमरजेंसी प्लान की नहीं लगातार प्लानिंग की जरुरत है। इसके लिए दिल्ली में पानी वाले तालाब और वॉटर बॉडी बढ़ाने की जरुरत है. दिल्ली का ग्रीन कवर पहले से बढ़ा है लेकिन उसे और बढ़ाया जाना चाहिए. ट्रैफिक कम करने और मल्टी स्टोरी बिल्डिंग कम बनाने की जरुरत है.