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कोलेस्ट्रॉल को हार्ट का दुश्मन माना जाता है. शरीर में कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना, मतलब हार्ट से जुड़ी तमाम बीमारियों का रिस्क बढ़ना. हमारे शरीर में दो तरह के कोलेस्ट्रॉल होते हैं गुड कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल. गुड कोलेस्ट्रॉल को हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन (HDL) और बैड कोलेस्ट्रॉल को लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) कहा जाता है. आज के समय में कोलेस्ट्रॉल की समस्या लोगों में तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में ये जानना बहुत जरूरी है कि आखिर शरीर में कब कोलेस्ट्रॉल आपके लिए घातक बन जाता है?
कोलेस्ट्रॉल एक तरीके का फैट होता है जिसका निर्माण लिवर करता है. गरिष्ठ, चिकनाईयुक्त फूड, जंकफूड आदि जितना ज्यादा खाया जाता है, उतना ज्यादा ये बनता है. जब ये शरीर में जरूरत से ज्यादा हो जाता है तो नसों में जम जाता है. इसके कारण शरीर में रक्त संचार ठीक से नहीं हो पाता है. इसके कारण हार्ट को पंप करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है. ऐसे में ये हार्ट अटैक और हार्ट से जुड़ी तमाम परेशानियों की वजह बन सकता है.
इस मामले में डॉ. रमाकान्त शर्मा की मानें तो LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल 100 mg/dL से कम होना चाहिए. अगर ये इससे ज्यादा बढ़ता है, तो आपको अलर्ट होने की जरूरत है. कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 130 mg/dL या इससे ज्यादा हो जाए, तो इसे बॉर्डर माना जाता है. 160 mg/dL या इससे ज्यादा होने पर ये खतरनाक हो जाता है और 190 mg/dL से ज्यादा हो जाए, तो इसे बेहद खतरनाक माना जाता है. ऐसी स्थिति में कोलेस्ट्रॉल के कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है.
LDL का शरीर में ज्यादा होना खतरनाक है, वहीं HDL का कम होना ठीक नहीं होता. शरीर में HDL का लेवल 60 mg/dL या इससे ज्यादा होना चाहिए. 40 mg/dL तक या इससे कम होने पर इसे काफी कम माना जाता है. वहीं गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल को मिलाकर टोटल कोलेस्ट्रॉल की बात करें, तो ये 200 mg/dL या इससे कम होना चाहिए.
खराब कोलेस्ट्रॉल के तेजी से बढ़ने के दो कारण हैं. पहला गलत खानपान और दूसरा फिजिकल एक्टिविटी नहीं करना. हम जो कुछ भी खाते हैं, उसे पचाना भी जरूरी होता है. लेकिन आज के समय में लोग बाहर का जंकफूड वगैरह तो जमकर खाते हैं, लेकिन न एक्सरसाइज करते हैं, न वॉक करते हैं और न ही कोई और ऐसा कोई काम करते हैं, जिससे खाने को पचाया जा सके.
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