देशभर में फैले कोरोना वायरस (Cororna virus) को ट्रैक करने के लिए केंद्र सरकार आरोग्य सेतु ऐप (Aarogya setu app) लॉन्च किया था. सरकार के इस ऐप को अब तक दुनिया में सबसे ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है. इस ऐप की सफलता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जल्द ही आरोग्य सेतु जैसा ऐप लॉन्च करने जा रहा है, जिसमें वो सारी तकनीकि खासियतें होंगी, जो आरोग्य सेतु ऐप में मौजूद हैं.
1/5WHO की ओर से जो ऐप लॉन्च किया जाएगा. इस ऐप में ब्लूटूथ की मदद से कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को ट्रैक किया जा सकेगा. यह ऐप यूजर्स से कोरोना के लक्षण के बारे में पूछेगा. इसके साथ ही उसका सॉल्युशन भी बताया जाएगा. संगठन के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी बर्नाडो मारिआनो ने रॉयटर्स को बताया कि इसके लोगों को यह भी बताया जाएगा कि कैसे वो इस बीमारी की जांच करवा सकते हैं. हालांकि यह देश के ऊपर निर्भर होगा कि वो कैसे जांच करवाएगा.
2/5हमारी सहयोगी वेबसाइट ज़ी न्यूज के मुताबिक, मारिआनो ने कहा कि WHO जल्द ही ऐप को प्ले स्टोर और आईओएस पर लॉन्च करेगा. इस ऐप की तकनीक को कोई भी सरकार ले सकेगी, उसमें नए फीचर डालकर के अपना वर्जन लॉन्च कर सकती है.
3/5बता दें भारत के अलावा इस समय आस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम ने अपना खुद का ऐप लॉन्च किया है, जिसकी मदद से वायरस को ट्रैक किया जा सकेगा. बता दें गूगल और माइक्रोसॉफ्ट में पहले काम कर चुके कुछ इंजिनियर्स और डिजाइनर्स WHO के ऐप पर काम कर रहे हैं. मोबाइल में कॉटैक्ट ट्रेसिंग ऐप हो, तो लोगों के बारे में ये पता लगाया जा सकता है कि वो कहां आए- गए. और कहीं वो किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में तो नहीं आए. इसके लिए ये ऐप ब्लूटूथ सेंसर का इस्तेमाल करता है.
4/5अगर वो किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के आस पास होंगे, तो तुरंत उनके पास एलर्ट का मैसेज जाएगा. इस ऐप का एक फायदा ये भी है कि लोगों को पहले के दौर में किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बारे में पता सकते हैं.
5/5मोबाइल कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप के लिए जीपीएस के बजाय ब्लूटूथ तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. वजह ये है कि इसमें फोन की बैटरी कम खर्च होती है. ये ज्यादा सटीक होते हैं और जीपीएस अक्सर बहुमंजिला इमारतों में काम नहीं करते.