हवा में उड़ते कैमरों का इस्तेमाल रोजाना बढ़ रहा है. कोविड-19 महामारी के चलते देशभर में लगे लॉकडाउन में तो लोगों पर निगाह रखने के लिए ड्रोन ने एक अहम रोल निभाया है. मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) कॉमर्शियल इस्तेमाल काफी समय से हो रहा है.
1/9अब तो सामान की डिलीवरी में भी ड्रोन के इस्तेमाल के प्रयोग किए जा रहे हैं और जल्द ही हम आसमान से सामान की होम डिलीवरी होते हुए भी देख पाएंगे.
2/9कुछ जगहों पर ड्रोन का इस्तेमाल खेती में भी किया जा रहा है. हमारे कृषि वैज्ञानिक भी खेती में ड्रोन की इस्तेमाल की संभावना तलाशने में जुटे हुए हैं. कई स्थानों पर खेती पैमाइश के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है.
3/9खेती में ड्रोन के इस्तेमाल के बारे में कृषि वैज्ञानिक डॉ. मयंक राय का कहना है कि खेती खुले आसमान में किया जाने वाला काम है. इस पर कभी मौसम तो कभी बीमारी और कभी कीटों के हमले का खतरा बना रहता है. आजकल तो गाय, नीलगाय, सूकर, बंदर जैसे पशु भी खेती के बड़े दुश्मन बनकर सामने आ रहे हैं.
4/9ऐसे में खेत से दूर घर पर बैठे किसान के लिए एक ड्रोन काफी हद तक खेती के इन दुश्मनों से फसल को बचाने में मदद कर सकता है.
5/9डॉ. मयंक खेती में ड्रोन को महत्व में कई रूप में देखते हैं. उन्होंने खेत की मिट्टी, फसल की रखवाली, बीज बिखेरना, कीटनाशकों का छिड़काव और फसल की देखभाल में ड्रोन के रोल को अलग-अलग तरीके से देखा है.
6/9ड्रोन से हम एक बार में ही खेत के अलग-अलग हिस्सों का आकलन कर सकते हैं. क्योंकि खेत में धूम-धूम कर पूरी स्थिति का एक बार में आकलन करने में थोड़ी दिक्कत आती है
7/9ड्रोन की मदद से हम खेतों में बीजों का छिड़काव कर सकते हैं. इससे बीजों के छिड़काव में लगाने वाली लागत तो कम होगी ही. कई नए स्टार्टअप ने ऐसे ड्रोन बनाए हैं जो 75 फीसदी सटीकता के साथ बीज रोपते हैं और रोपण लागत में 85 फीसदी तक की कमी आएगी. ये नए ड्रोन बीज को शूट करते हैं और पोषक तत्वों को मिट्टी में डालते हैं.
8/9खेतों में ड्रोन का इस्तेमाल हम फर्टिलाइजर या कीटनाशकों के छिड़काव के लिए भी कर सकते हैं. इससे लागत कम होगी और केमिकलों का पूरा-पूरा इस्तेमाल हो सकेगा.
9/9फसल की निगरानी एक बड़ी चुनौती है. ड्रोन की मदद से किसान दूर बैठे ही फसल पर निगरानी कर रख सकते हैं. फसल को पशुओं से होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं.