खेती-बाड़ी से जुड़े कामों में एक काम है रेशम के कीट पालन का. कच्चा रेशम बनाने के लिए रेशम के कीटों का पालन रेशम उत्पादन (Sericulture) या रेशम कीट पालन कहलाता है.
1/7रेशम उत्पादन के मामले में भारत चीन के बाद दूसरे स्थान पर है. यहां हर किस्म का रेशम पैदा होता है. भारत में 60 लाख से भी अधिक लोग अलग-अलग तरह के रेशम कीट पालन में लगे हुए हैं.
2/7रेशम की खेती तीन प्रकार से होती है- मलबेरी खेती, टसर खेती व एरी खेती. रेशम प्रोटीन से बना रेशा है. सबसे अच्छा रेशम शहतूत, अर्जुन के पत्तों पर पलने वाले कीड़ों के लार्वा से बनाया जाता है.
3/7भारत में केन्द्रीय रेशम रिसर्च सेंटर बहरामपुर में 1943 में बनाया गया था. रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 1949 में रेशम बोर्ड की स्थापना की गई. मेघालय में केन्द्रीय इरी अनुसन्धान संस्थान और रांची में केन्द्रीय टसर अनुसन्धान प्रशिक्षण संस्थान तैयार किया गया.
4/7भारत में शहतूत रेशम का उत्पादन कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, जम्मू व कश्मीर और पश्चिम बंगाल में किया जाता है. बिना शहतूत वाले रेशम का उत्पादन झारखण्ड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, उत्तर प्रदेश तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों में होता है.
5/7सरकार रेशम कीट पालन के लिए ट्रेनिंग और फाइनेंस मुहैया कराती है. रेशम कीट पालन से जुड़ा सामान, रेशम कीटों के अंडे, कीटों से तैयार कोया को बिकवाना आदि में मदद की जाती है. शहतूत के पत्ते खाकर कीट जो रेशम बनाता है उसे मलबरी रेशम कहते हैं.
6/7मध्य प्रदेश सरकार रेशम पालन के लिए किसानों लोन मुहैया करा रही है. इसके लिए ज्यादा जानकारी www.eresham.mp.gov.in वेबसाइट से हासिल की जा सकती है. रेशम कृमि पालन में रूचि रखने वाले किसान अपना आवेदन इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकते है.
7/7किसान जो अपनी 01 एकड़ जमीन में शहतूती पौधरोपण और रेशम कीट पालन कर ककून उत्पादन करना चाहते हैं, उन्हें सरकार हर तरह की मदद मुहैया करा रही है.