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आखिर ये PNR नंबर होता क्या है, इसकी इतनी जरूरत क्यों होती है, टिकट का स्टेटस चेक करने के अलावा इसका और क्या काम है
अगर आप ट्रेन में सफर करते हैं तो आप PNR नंबर के बारे में बहुत अच्छी तरह से जानते होंगे. PNR नंबर 10 अंकों का एक यूनीक नंबर होता है जिसमें आपकी यात्रा से जुड़ी कई अहम जानकारियां उपलब्ध होती हैं. PNR नंबर सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं बल्कि रेलवे के लिए बहुत जरूरी होता है. हालांकि, PNR नंबर सिर्फ रिजर्वेशन टिकट के साथ ही मिलता है. अनारक्षित टिकट पर PNR नंबर जनरेट नहीं होता है. देश का एक आम यात्री PNR नंबर को सिर्फ टिकट का स्टेटस चेक करने वाला एक साधन ही समझता है, जबकि हकीकत तो काफी बड़ी है.
PNR का पूरा नाम Passenger Name Record होता है. किसी भी टिकट के साथ जनरेट होने वाले PNR नंबर में यात्री का नाम, उसकी आयु, लिंग, घर का पता, यात्रा की तारीख, गाड़ी संख्या, यात्रा शुरू करने वाले स्टेशन का नाम, गंतव्य रेलवे स्टेशन, क्लास, सीट नंबर, कोच नंबर, किराया, बुकिंग की लोकेशन, टिकट के लिए पेमेंट का तरीका आदि. 1 पीएनआर नंबर में ज्यादा से ज्यादा 6 यात्रियों की डीटेल्स ही दर्ज की जा सकती हैं. यही वजह है कि आप एक बार में अधिकतम 6 लोगों के लिए टिकट बुक कर सकते हैं.
बताते चलें कि ऑनलाइन टिकट बुक कराने के लिए आपके पास IRCTC अकाउंट होना जरूरी है. IRCTC से बुक होने वाली सभी टिकट की डीटेल्स भारतीय रेल के डाटाबेस CRIS (सेंटर फॉर रेलवे इंफोर्मेशन सिस्टम) पर सेव हो जाती हैं.
10 डिजिट वाले पीएनआर नंबर का पहला अंक उस रेल जोन के बारे में बताता है, जिस जोन से टिकट बुक की जाती है. इसके बाद के दो अंक यात्री आरक्षण प्रणाली के बारे में बताते हैं. इसके बाद बाकी के बचे 7 अंकों में यात्रियों की सारी डीटेल्स होती है. बताते चलें कि यात्रा खत्म होने के बाद पीएनआर नंबर फ्लश कर दिया जाता है. हालांकि, 1 साल के बाद उसी नंबर का दूसरा पीएनआर नंबर दोबारा जनरेट किया जा सकता है.