भारतीय रेलवे की ट्वाय ट्रेन सेवाएं हमेशा से ही पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही हैं. आजकल असम के Sualkuchi शहर में असम साहित्य सभा (AsomSahityaSabha) में दार्जिलिंग हिमाल्यन रेलवे के बारे में भी जानकारी दी जा रही है. बच्चे और बड़े सभी दार्जिलिंग हिमाल्यन रेलवे के इतिहास को जानने के लिए काफी आकर्षित हो रहे हैं. यहां लोगों को पता चल रहा है कि किन मुश्किलों के बाद उत्तर पूर्व के इस शहर में ट्रेन चलाई गई.
1/5दार्जिलिंग हिमालयी रेल (Darjeeling Himalayan Railway), पर्यटकों के लिए काफी लोकप्रिय है. दार्जिलिंग में चलने वाली ये ट्रेन एक "ट्वाय ट्रेन" है. राज्य पश्चिम बंगाल में न्यू जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के बीच ये ट्वाय ट्रेन चलाई जाती है.
2/5दार्जिलिंग हिमाल्यन रेलवे (Darjeeling Himalayan Railway) को 1879 और 1881 के बीच विकसित किया गया था. इस रेलवे लाइन की कुल लंबाई 78 किलोमीटर (48 मील) है. ये ट्रेन न्यू जलपाईगुड़ी में लगभग 100 मीटर (328 फीट) से लेकर दार्जिलिंग में 2,200 मीटर (7,218 फुट) की ऊंचाई पर चलती है.
3/5दार्जिलिंग हिमाल्यन रेलवे (Darjeeling Himalayan Railway) के तहत ट्वाय ट्रेन को चार आधुनिक डीजल इंजनों द्वारा चलाया जाता है. दैनिक कुर्सियांग-दार्जिलिंग वापसी सेवा और दार्जिलिंग से (भारत का सबसे ऊँचा रेलवे स्टेशन) के बीच चलने वाली दैनिक ट्रेनों को पुराने ब्रिटिश काल में बनाए गए बी श्रेणी के भाप इंजन, डीएचआर 778 द्वारा चलाया जाता है. इस रेलवे को यूनेस्को द्वारा नीलगिरि पर्वतीय रेल और कालका शिमला रेलवे के साथ भारत की पर्वतीय रेल के रूप में विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. इस रेलवे का मुख्यालय कुर्सियांग शहर में है.
4/5भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने शिमला घूमने जाने वाले यात्रियों के लिए कालका (Kalka) से शिमला (Shimla) के बीच खास हिम दर्शन ट्रेन HIM DARSHAN EXPRESS चलाने का ऐलान किया है. इस ट्रेन में Vistadome coaches (Glass Roof Top) हैं. 25 दिसम्बर को ये ट्रेन पहली बार चलाई गई. पहले ही दिन ही ये ट्रेन 100% भर कर चली. इस ट्रेन में 90 यात्री सवार थे.
5/5ट्रेन नम्बर 52459/52460 हिम दर्शन एक्सप्रेस (Him Darshan Express) बेहद खास तरह की ट्रेन है. इस ट्रेन में कुल 7 AC vistadome coaches लगे हुए हैं. इनमें से एक डिब्बा फस्ट क्लास का है. इन डिब्बों में चारों तरफ काफी बड़े - बड़े शीशे लगे हुए हैं. इन डिब्बों में बैठ कर ऐसा लगता है कि आप किसी खुली वादी में घूम रहे हों.