अधिकतर नौकरी करने वाले लोगों का एक गोल होता है- चैन और सुकून भरी रिटायरमेंट वाली जिंदगी. और इसके लिए टाइम से रिटायरमेंट प्लानिंग करनी उतनी ही जरूरी है. लेकिन यहीं पर हम पिछड़ जाते हैं. इससे होता है सालों तक आपने काम किया, मेहनत की लेकिन रिटायरमेंट पर अब हर महीने की सैलरी का न आना खल सकता है. ऐसे में नौकरी वाले सालों का फायदा उठाने में ही समझदारी है. नौकरीपेशा वाले रिटायरमेंट के बाद अपने लाइफ का नया वक्त इंजॉय कर पाएं, इसके लिए उन्हें अभी से ये 10 बातें जान लेनी चाहिए और इन पर अमल करना भी शुरू कर देना चाहिए.
1/10अच्छी रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए आपको जो सबसे पहली सलाह मिलेगी, वो यही कि जितनी जल्दी हो सके अपने रिटायरमेंट के लिए प्लान करना शुरू कर दें. इससे आपको निवेश के ज्यादा साल मिलते हैं, और कंपाउंडिंग ब्याज का फायदा दोगुना-तिगुना हो जाता है. यहां तक कि आप इससे जल्दी रिटायर होने के बारे में भी सोच सकते हैं. आप अपने 30s या 40s का इंतजार करने की बजाय 20s में भी इसके बारे में सोचें तो फायदे में रहेंगे.
2/10आपको किस उम्र में रिटायर होना है, इसपर भी निर्भर करता है कि आपका रिटायरमेंट फंड कितना बड़ा होना चाहिए. क्योंकि रिटायरमेंट के बाद आप कब तक जीवित रहते हैं, इसे देखते हुए आपके पास एक अच्छा खासा अमाउंट होना चाहिए. ऐसे में अगर आप रिटायरमेंट एज तय कर लेते हैं तो आपको पता चल जाता है कि आपके पास प्लानिंग के लिए कितने साल बचे हैं. इससे आप निवेश के सही फैसले ले पाते हैं.
3/10आपको रिटायरमेंट के साथ अपने परिवार-बच्चों के भविष्य की सुरक्षा की चिंता भी होगी. हेल्थकेयर का जुगाड़ भी करना होगा. बच्चों की पढ़ाई और शादी भी होगी. अगर आप इनके लिए अलग से प्लानिंग नहीं करते तो आपको बाद में अपने रिटायरमेंट फंड का थैला खोलना पड़ सकता है और ये बिल्कुल भी समझदार निवेशक की निशानी नहीं है. अलग लक्ष्यों के लिए सरप्लस निवेश करें.
4/10बढ़ती महंगाई दर का भी ध्यान रखें. जैसे जैसे महंगाई बढ़ेगी आपके रिटायरमेंट फंड की वैल्यू भी घटेगी. जैसेकि आज जो सामान आपको जिस कीमत पर मिल रहा है, 20 साल बाद, 30 साल बाद उसकी कीमत उससे कहीं ज्यादा होगी. ऐसे में उस वक्त के लिए आपको इंफ्लेशन रेट को ध्यान में रखते हुए रिटायरमेंट फंड का साइज तय करना होगा.
5/10आप निवेश कहां करते हैं, इसपर निर्भर करता है कि आप बुढ़ापे तक कितना बड़ा फंड इकट्ठा कर सकते हैं. लॉन्ग टर्म गोल के लिए आपको लंबी स्ट्रेटेजी की जरूरत होती है. साथ ही आपको फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसे लगाकर, या पैसे बचाकर बहुत कामयाबी हासिल नहीं होगी. इसके लिए आपको अपनी उम्र के हिसाब से रिस्क लेना भी सीखना होगा. अपना इन्वेस्टमेंट प्रोफाइल तैयार करके लिए अनुमानित सालाना रिटर्न, रिटायरमेंट फंड कितना जुटाना है, आपकी उम्र और इसके लिहाज से रिस्क का लेवल कैलकुलेट करें और फिर इन्वेस्टमेंट ऑप्शन चुनें.
6/10बुढ़ापा आराम से कटे इसके लिए जरूरी है आपके पास आपके मेडिकल खर्चों के लिए मोटा बजट होना. आपको इसकी बहुत जरूरत महसूस होगी. ऐसे में अपने रिटायरमेंट फंड को बचाने के लिए अभी से आप फैमिली फ्लोटर प्लान या पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस जरूर लें.
7/10झटपट पर्सनल लोन लेना, इंस्टैंट लोन अप्रूव हो जाना, तुरंत क्रेडिट कार्ड जारी हो जाना, ये सभी सुविधाएं हमारे लिए लाइफ आसान बनाती हैं, लेकिन कर्ज का एक जाल भी बुनती हैं, अगर आप सावधान नहीं रहते हैं तो. ऐसे में कर्ज से बचें. अगर नहीं बचें तो आपके पास बचाने या निवेश करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं रहेगा.
8/10सालों की प्लानिंग भी कभी-कभी काम नहीं आती और जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है तो समझ नहीं आता क्या करें. ऐसे में हमेशा एक एडिशनल फंड बनाकर चलना चाहिए. थोड़ा-थोड़ा करके ही सही. बूंद-बूंद से घड़ा भरता है. नियमित अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा बचाने से आपके पास लॉन्ग टर्म के लिए एक कंटिजेंसी या इमरजेंसी फंड तैयार हो जाएगा.
9/10आखिर में अपने पोस्ट रिटायरमेंट खर्चों को देखें और कैलकुलेट करें कि आपकी जिम्मेदारियां और जरूरतें क्या होंगी, इसके हिसाब से आपको अंदाजा होगा कि आगे चलकर कितना बड़ा फंड बनाना है. हालांकि, रिटायरमेंट कॉर्पस कितना बड़ा हो, इसपर कोई निश्चित आंकड़ा नहीं होता, लेकिन एक्सपर्ट्स ऐसा कहते हैं कि आपको अपनी सालाना आय का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए लगाना चाहिए.
10/10आपकी सैलरी में ही रिटायरमेंट फंड तैयार हो जाए, ये सबके लिए मुमकिन नहीं. ऐसे में आपके लिए जरूरी है कि इनकम के दूसरे रास्ते भी निकालें. अगर आपका कोई पैशन है तो ये जरूर देखें कि उसके जरिए आप पैसे कैसे कमा सते हैं.