Personal finance tips: पैसा कमाना जितना जरूरी है, उसे खर्च करने या सही से इस्तेमाल करना आना भी उतना ही जरूरी है. पर्सनल फाइनेंस (Personal finance) में अगर आप गलत तरीके से खर्च करते हैं तो कमाने के बावजूद आप आर्थिक परेशानी का सामना कर सकते हैं. हालांकि निवेश (nvestment) की बात करें तो निश्चित तौर पर यह आपकी आय और खर्च पर ही निर्भर करता है. जानकारों का मानना है कि भारत में पर्सनल फाइनेंस के मामले में अधिकांश लोगों का हिसाब-किताब दुरुस्त नहीं है. इसलिए पैसे बचाने से पहले पैसे खर्च करने के तरीकों को समझना बेहद जरूरी है.
1/6आप कमाते जरूर हैं लेकिन कितना पैसा कहीं निवेश कर सकते हैं, यह पूरी तरह से आपकी इनकम और खर्च पर निर्भर करता है. आय के स्रोतों और तमाम खर्चों का पता लगाए बिना निवेश के संबंध में कोर्इ भी फैसला ले पाना बहुत मुश्किल है. इसलिए अपनी आर्थिक क्षमता का आकलन करें. इसके बाद पैसे बचने पर उसे आप म्यूचुअल फंड, एफडी, जीवन इंश्योरेंस पॉलिसी आदि में निवेश कर सकते हैं.
2/6इस बात का दावा कोई नहीं कर सकती है कि किसी के साथ कल क्या होगा. आपने किसी में निवेश किया और रिटर्न कितना मिलेगा, यही बात काफी नहीं है. निवेश की सुरक्षा के बारे में भी सोचना चाहिए. इस मामले में टर्म प्लान के जरिए जीवन बीमा का ऑप्शन बेहतर माना जाता है.
3/6निवेश एक ऐसी चीज है जिसमें कोई इंसान रिस्क उठा सकता है और कोई इससे पूरी तरह बचना चाहता है. जानकारों के मुताबिक, अच्छा होगा कि शुरू में ज्यादा रिस्क लेने से बचा जाए. जब आप बाजार में चीजों को समझ लें तो जोखिम बढ़ा सकते हैं.
4/6जीवन के हर एक लक्ष्य के लिए पैसा बचाना होता है. इसी हिसाब से आप निवेश करते हैं. इस तरह आपको अपने हर लक्ष्य को निवेश के साथ जोड़ना होगा. मौजूदा स्थितियों को देखते हुए आप निवेश कर सकते हैं. यह निवेश म्यूचुअल फंड, बैंक एफडी आदि में किया जा सकता है. इस समय एसेट के आवंटन को लेकर सोचना-समझना पड़ता है.
5/6आपने अगर जीवन में प्लान बनाया है तो उस पर अमल करें और करीब से नजर रखें. ऐसा इसलिए कि हर साल तमाम तरह के बदलाव होते हैं. इन बदलावों के बारे में जानकारी लेने की कोशिश करें. मान लिया कि किसी निवेश में आपने सोचा हो कि 14 फीसदी रिटर्न मिलेगा. लेकिन, असल में रिटर्न छह प्रतिशत ही मिला. तो ऐसे में अपने निवेश को बदलने की भी जरूरत पड़ती है.
6/6अगर आपकी भविष्य को लेकर कोई प्लानिंग है तो आपको उसका ध्यान रखना होगा. मान लीजिए आपको बच्चे को 18 साल बाद विदेश में पढ़ाना है तो वर्तमान समय की लागत को समझें और उतने साल बाद की लागत कितनी हो सकती है, उसको ध्यान में रखते हुए बचत अभी से करना शुरू करें.