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(Image: Reuters)
SGB or Gold Bond Investment: सोने को लेकर भारतीयों का लगाव काफी पुराना और भावनात्मक है. अहम बात यह भी है कि फिजिकल गोल्ड यानी गहने, बिस्किट या सिक्के के रूप में सोने को रखना हमेशा से भारतीयों की पहली पसंद रहा है. बाजार में निवेश के दूसरे और अच्छे ऑप्शन होने के बावजूद सोने की खरीदारी कम नहीं हुई. बदलते समय के साथ सोना खरीदने और उसमें निवेश का तरीका भी बदला है. आज के समय में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) या गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) सोने में निवेश का सुरक्षित और अच्छा रिटर्न हासिल करने का एक बेहतर विकल्प है.
लंबी अवधि के नजरिए से अगर SGB या गोल्ड बॉन्ड में निवेश किया जाए, तो मैच्योरिटी पर न केवल ब्याज से कमाई होगी बल्कि कैपिटल गेन भी होगा. फिजिकल गोल्ड के मामले में चोरी, उसकी शुद्धता और सेफ लॉकर जैसी दिक्कतें बनी रहती हैं. ऐसे में अगर आपको इन बातों का डर है, तो बेहतर है कि सोने के गहने, सिक्के खरीदने की बजाय गोल्ड बॉन्ड ETF में निवेश करें. आसान शब्दों में कहें, तो फिजिकल गोल्ड की बजाए गोल्ड बांड को मैनेज करना अधिक सरल और सुरक्षित है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) भारत सरकार की ओर से नियमित अंतराल पर सोने के मौजूदा भाव पर जारी किए जाते हैं. SGB की मैच्योरिटी 8 साल होती है. जबकि, लॉक इन पीरियड पांच साल है. इसका मतलब है कि आप पांच साल बाद बॉन्ड बेच सकते हैं. लेकिन, इस बात का ध्यान रखें, अगर आपने एसजीबी को मैच्योरिटी तक बनाए रखा, तो आपको निवेश पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना होगा. वहीं, आपको 2.5 फीसदी सालाना ब्याज मिलेगा, जिसका भुगतान हर 6 महीने पर किया जाता है.
एसजीबी में जितनी मात्रा में निवेशक पैसा लगाता है, वह सुरक्षित रहता है. क्योंकि मैच्योरिटी के समय उसे मौजूदा बाजार का भाव मिलता है. इस तरह, फिजिकल गोल्ड खरीदने की बजाय एसजीबी में पैसा लगाना एक बेहतर विकल्प हो सकता है. इसमें फिजिकल गोल्ड की तरह जोखिम नहीं है, और स्टोरेज के लिए भी निवेशक को कुछ खर्च नहीं करना पड़ता है. निवेशक को इस बात की गारंटी मिलती है कि बॉन्ड की मैच्योरिटी पर उसे सोने का बाजार भाव और उतने समय का निर्धारित ब्याज मिलेगा.
(डिस्क्लेमर: यहां सिर्फ गोल्ड बॉन्ड के बारे में जानकारी दी गई है. ये निवेश की सलाह नहीं है. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)