ई-फार्मेसी के खिलाफ आज बंद रहेंगी दवा की दुकानें, हड़ताल में 7 लाख व्‍यापारी शामिल

ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट ने सरकार के फैसले का विरोध किया है
ई-फार्मेसी के खिलाफ आज बंद रहेंगी दवा की दुकानें, हड़ताल में 7 लाख व्‍यापारी शामिल

इस मुद्दे की गंभीरता ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री के ढेरों मामलों से जगजाहिर है.

दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ दवा दुकानदारों की एक शीर्ष संस्थान ने ऑनलाइन दवा बिक्री को नियमित करने के केंद्र के कदम के खिलाफ शुक्रवार (28 सितंबर) को एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की है. ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (एआईओसीडी) ने सरकार के फैसले का विरोध किया है और कहा कि ई-फार्मेसी से उनके धंधे पर खतरा उत्पन्न हो गया है और इससे दवाओं के दुरुपयोग का जोखिम पैदा हो सकता है. इसमें करीब 7 लाख व्‍यापारी शामिल हुए हैं.

सरकार से ई-फार्मेसी को बंद करने की मांग
एआईओसीडी के संगठन सचिव और रिटेल डिस्ट्रब्यूटर्स केमिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप नांगिया ने कहा, 'एआईओसीडी ने ज्ञापनों के माध्यम से प्रशसन और संबंधित विभागों से बार-बार अपील की है. इस मुद्दे की गंभीरता ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री के ढेरों मामलों से जगजाहिर है.' उन्होंने कहा, 'एआईओसीडी पहले ही दो भारत बंद कर चुका है. यदि अपील पर सरकार का सकारात्मक जवाब नहीं आता है तो हमारे पास राष्ट्रव्यापी बंद के अलावा अन्य विकल्प नहीं होगा. 28 सितंबर को देशभर में दवा की दुकानें बंद रहेंगी.'

ऑनलाइन दवाओं पर मिल रही 70% तक छूट
दवा के दामों का विनियमन सरकार करती है. ऑनलाइन पोर्टल 70 फीसद तक छूट देते हैं जबकि थॉक विक्रेताओं की दुकानों पर दस फीसद छूट मिलती है. एआईओसीडी के सदस्यों का आरोप है कि ई-फार्मेसी से दवाओं के अतार्किक इस्तेमाल और नकली दवाओं की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा.

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ई-फार्मेसी द्वारा दवाओं की बिक्री पर मसविदा नियमावली लाई है जिसका लक्ष्य भारत में दवाओं की बिक्री का विनियमन करना तथा मरीजों को प्रामणिक ऑनलाइन पोर्टलों से असली दवाएं उपलब्ध कराना है.

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