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विज्ञापनों पर निगरानी रखने वाली संस्था एडवर्टाइजिंग एंड स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया ASCI ने शिकायतों पर साल 2021-22 की रिपोर्ट जारी की है. ASCI के मुताबिक सबसे बड़ी समस्या विज्ञापन में सही तस्वीर न देने की रही है. जबकि सबसे ज्यादा आपत्ति वाले विज्ञापन 33% शिक्षा क्षेत्र से मिले. बाकी आपत्ति वाले विज्ञापनों में हेल्थकेयर की 16% और पर्सनल केयर की 11% हिस्सेदारी रही. क्रिप्टो का 8-8% हिस्सा वर्चुअल डिजिटल असेट कंपनियों, ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग और फूड एंड बेवरेज कंपनियों के आपत्तिजनक विज्ञापनों का रहा.
ASCI ने अलग अलग माध्यमों पर उपलब्ध 5532 विज्ञापनों की निगरानी की और उसी आधार पर ये निष्कर्ष निकाला है. ASCI के मुताबिक 39% विज्ञापनों को एडवर्टाइजर ने कंटेस्ट नहीं किया. यानि आपत्तियों पर कोई एतराज नहीं किया. जबकि 55% विज्ञापनों पर उठाए गए सवाल जायज पाए गए. 4% विज्ञापनों के खिलाफ आई शिकायतों में कोई दम नहीं मिला. ASCI के मुताबिक उसके नियमों पर खरा उतरने के लिए 5532 विज्ञापनों में से 94% ऐसे पाए गए जिनमें सुधार की जरूरत मिली. सेलिब्रिटीज़ वाले विज्ञापनों के मिसलीडिंग होने की शिकायतों में 41% की बढ़ोतरी मिली.
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ASCI के मुताबिक 2021 में सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाले क्षेत्रों में पर्सनल केयर, फूड एंड बेवरेजेस, क्रिप्टो और ऑनलाइन रियल मनी गेम वाले कारोबार रहे हैं. सबसे ज्यादा आपत्ति वाले विज्ञापनों की भरमार 48% डिजिटल प्लेटफॉर्म्स रही है. उसके बाद प्रिंट का नंबर रहा जो 47% विज्ञापन आपत्ति वाले मिले. टीवी और अन्य की हिस्सेदारी 5% रही. ASCI के मुताबिक 2021 में विज्ञापन जगत का आकार बढ़कर 70715 करोड़ रु के करीब रहा. इसमें डिजिटल मार्केटिंग का हिस्सा बढ़ रहा है जो 21,353 करोड़ रु रहा. ASCI का मानना है कि 2023 तक विज्ञापन जगत का आकार बढ़कर 93119 करोड़ रु के करीब पहुंच जाएगा. इसमें से डिजिटल का हिस्सा 35809 करोड़ रु के करीब होगा.