CNG Price Hike: एक महीने में दूसरी बार महंगी हुई सीएनजी, मुंबई में आज से 6 रुपये प्रति किलो बढ़ गए दाम

CNG Price Hike: मुंबई में लोगों को आज से सीएनजी के लिए 6 रुपये ज्यादा देना होगा. वहीं पीएनजी की कीमतों में भी 4 रुपये प्रति किलो का इजाफा किया गया है.
CNG Price Hike: एक महीने में दूसरी बार महंगी हुई सीएनजी, मुंबई में आज से 6 रुपये प्रति किलो बढ़ गए दाम

CNG Price Hike: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में लोगों के लिए आज से सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई. महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने मंगलवार देर शाम सीएनजी की कीमतों में छह रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा कर दिया है. वहीं पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की कीमत में भी 4 रुपये प्रति किलो का इजाफा कर दिया गया है. एक महीने के अंदर कीमतों में यह दूसरी वृद्धि है.

ग्लोबल दबाव में बढ़े दाम

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों के बीच CNG और PNG कीमतों में बढ़ोतरी की गई है. पिछले कई हफ्तों से बढ़ती कीमतों के चलते आपूर्तिकर्ता और वितरक औद्योगिक आपूर्ति में कटौती करने को मजबूर हो गए थे. इस साल अप्रैल के बाद से कीमतों में यह छठी बढ़ोतरी है.

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कितनी बढ़ी कीमतें

एमजीएल ने एक बयान में कहा, "गैस लागत में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण हमने लागत की भरपाई करने का फैसला किया है. इसलिए हमने CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) की खुदरा कीमत बढ़ाकर 86 रुपये (प्रति किलोग्राम) और घरेलू PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की कीमत 52.50 रुपये (प्रति यूनिट) कर दिया है."

यूटिलिटी ने कहा कि मूल्य वृद्धि घरेलू गैस आवंटन में कमी को पूरा करने के लिए है, क्योंकि इसने सीएनजी और पीएनजी की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए अतिरिक्त बाजार मूल्य वाली प्राकृतिक गैस के स्रोत को मजबूर किया.

जुलाई में भी बढ़ी थी कीमतें

इसके पहले CNG और PNG की कीमतों में 12 जुलाई को इजाफा हुआ था. जब सरकारी कंपनी ने CNG के रीटेल प्राइस में 6 रुपये प्रति किलो और PNG की कीमतों में 3 रुपये का इजाफा किया था.

केंद्र ने 1 अप्रैल से घरेलू और आयातित प्राकृतिक गैस की कीमत में 110 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की थी. इससे राज्य द्वारा इन ईंधनों पर वैट को 13.5 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत करने की घोषणा की गई थी.

सरकार का है दखल

ऊर्जा क्षेत्र को उदार बनाने के बावजूद, सरकार अभी भी प्राकृतिक गैस की कीमत और आपूर्ति दोनों को काफी हद तक नियंत्रित करती है और कीमतें और आपूर्ति आवंटन साल में दो बार अग्रिम रूप से तय किया जाता है. 1 अप्रैल को तय की गई कीमतें सितंबर तक वैलिड हैं, इसके बाद अगला संशोधन 1 अक्टूबर को किया जाएगा.

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