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Budget 2023: बजट को लेकर बार-बार इस्तेमाल होने वाले इन शब्दों के बारे में आप कितना जानते हैं?
देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी 2023 को केंद्रीय बजट (Union Budget 2023) पेश करेंगी. ये बजट नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट है. साल 2024 चुनावी साल होगा. अगले साल चुनाव के बाद ही नई सरकार का पूर्ण बजट पेश करेगी. लिहाजा इस बजट से आम आदमी को काफी उम्मीदें हैं. जब भी वित्त मंत्री (Finance Minister) बजट पेश करते हैं तो इस बीच कई तरह के शब्द बार-बार बोलते हैं, उनका मतलब ठीक से मालूम न होने के कारण तमाम लोग बजट भी ठीक से नहीं समझ पाते हैं. यहां जानिए ऐसे ही कुछ शब्दों के बारे में.
जब किसी देश द्वारा विदेशों से आयात की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य, उसकी तरफ से निर्यात की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के कूल मूल्य से अधिक हो जाता है, तो इसे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) कहा जाता है. बजट भाषण पढ़ते समय जब वित्त मंत्री देश के आयात-निर्यात की जानकारी देते हैं, तो इन दोनों के बीच के अंतर के बारे में भी बताते हैं. ऐसे में जब देश का इम्पोर्ट बिल एक्सपोर्ट की तुलना में ज्यादा होता है तो वित्त मंत्री देश को Current Account Deficit की जानकारी देते हैं.
पिछले कुछ समय से बजट के दौरान ये शब्द काफी कॉमन हो गया है. सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) में सरकार की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया विनिवेश या डिसइन्वेस्टमेंट (DisInvestment) कहलाती है. हर साल सरकार अपनी इनकम के एक बड़े सोर्स के रूप में विनिवेश का लक्ष्य तय करती है.
ये एक फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट होता है जिसमें पिछले एक वित्त वर्ष के दौरान भारत के आर्थिक विकास की समीक्षा की जाती है. बजट पेश करने से ठीक एक दिन पहले सदन में Economic Survey पेश किया जाता है.
देश में आर्थिक विकास कितनी तेजी से हो रहा है, इसका लेखा-जोखा GDP कहलाता है. ये देश की आर्थिक वृद्धि को मापने का पैमाना है. जीडीपी यानी ग्रोस डोमेस्टिक प्रोडेक्ट, इसे ऐसे समझ सकते हैं कि पूरे साल देश में कितने सामानों का उत्पादन हुआ और कितनी सेवाएं दीं. कुल उत्पादन और कुल सर्विस को जोड़ देते हैं.
HNI का मतलब है High Income Indivisuals. बड़े कॉरपोरेट या बहुत पैसा कमाने वाले क्रिकेटर या फिल्म स्टार्स को फाइनेंस की भाषा में HNI कहा जाता है. HNI से सरकार थोड़ा ज्यादा इनकम टैक्स लेती है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के ऊपर से टैक्स के बोझ को हल्का किया जा सके.
Outcome Budget एक तरह से मंत्रालयों और विभागों का प्रोग्रेस कार्ड होता है. बजट से पहले सरकार हर मंत्रालय से इस बात की रिपोर्ट मांगती है कि उन्होंने पिछले बजट की घोषणाओं पर कितना काम किया है.
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