&format=webp&quality=medium)
Budget 2023: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को देश के सामने आम बजट पेश करने जा रही हैं. यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट भी होने वाला है. ऐसे में Union Budget में आम आदमी को काफी सारे राहत मिलने की उम्मीद है. लेकिन मोदी सरकार के कार्यकाल में बजट ने काफी सारे बड़े बदलाव देखे हैं. वहीं कई साल से चली आ रही कई परपंराओं को भी बदला गया है. चाहें बजट पेश करने की तारीख हो या बजट पेश करने का तरीका, बीते कुछ साल में यह सभी बदल चुके हैं. आइए देखते हैं इन बड़े बदलावों की एक पूरी लिस्ट.
कोरोना महामारी के बाद देश ने काफी सारे बदलाव देखे. ऐसे ही 2021 में पहली बार देश में पूरी तरह से पेपरलेस बजट पेश किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार सदन में टैबलेट पर बजट पढ़ा. सभी को बजट के हॉर्ड कॉपी डॉक्यूमेंट्स के बजाए ऐप के जरिए बजट दिया गया.
संसद में बजट पेश करने के पहले वित्त मंत्री का बजट ब्रीफकेस हमेशा से चर्चा में रहा है. पारंपरिक रूप से वित्त मंत्री बजट डॉक्यूमेंट्स को अलग-अलग रंग के चमड़े के बैग में लेकर आते रहे हैं. लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2019 में इस परंपरा को भी बदल दिया. बजट को भारत की परंपरा को दिखाने के लिए सीतारमण ने इसे लाल रंग के कपड़े में लपेटकर बही-खाता का रूप दे दिया.

Zee Business Hindi Live TV यहां देखें
आजादी के बाद से ही देश का आम बजट फरवरी की आखिरी तारीख को पेश किया जाता रहा था. लेकिन मोदी सरकार ने 2017 में इस परंपरा को बदल दिया. तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) ने पहली बार 1 फरवरी को देश का आम बजट पेश किया. दरअसल बजट को आने वाले वित्त वर्ष के लिए पेश किया जाता है, जो 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च तक चलता है. ऐसे में फरवरी के अंत में बजट को पेश करने से इसमें पेश किए गए प्रावधानों को लागू करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता था. इसलिए मोदी सरकार ने बजट (Union Budget) को पेश करने की तारीख को बदलकर 1 फरवरी कर दिया.

संसद में बजट पेश करने के एक दिन पहले इकोनॉमिक सर्वे भी पेश किया जाता है. ऐसे में बजट (Union Budget 2023) पेश करने की तारीख में बदलाव करने के कारण इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) को पेश करने की तारीख में बदलाव कर दिया गया. अब देश के सामने 31 जनवरी को इकोनॉमिक सर्वे पेश किया जाता है. इकोनॉमिक सर्वे एक तरह का लेखा-जोखा होता है, जिसमें देश के बीत साल के आर्थिक हालात की पूरी जानकारी जाती है.

आपको बता दें कि एक लंबे समय तक देश में आम बजट के कुछ दिन पहले अलग से रेल बजट पेश किया जाता था. लेकिन मोदी सरकार ने 2016 में इस वर्षों पुरानी परंपरा को बदल दिया. साल 2016 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे आम बजट के साथ ही सदन में पेश किया था. देश में आखिरी इंडिपेंडेंट रेल बजट 2015 में तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने पेश किया था.
