Agriculture: बिहार में पारंपरिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके साथ ही मोटे अनाज का बीज उत्पादन बढ़ाने के लिए 50-50 हेक्टेयर का क्लस्टर बनाकर किसानों से पीपीपी (प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप) मोड पर खेती शुरू होगी. (Image- Pexels)
1/5बिहार सरकार, कृषि विभाग फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) और बीज उत्पादक कंपनियों को इसके लिए आगे करेगा. मिट्टी के अनुकूल फसलों के लिए किसानों को प्रेरित करने की योजना है. (Image- Pexels)
2/5कम पानी और सूखे की स्थिति में भी मोटे अनाज की फसल आसानी से उगाई जा सकती है. इसमें मंडुआ (रागी), ज्वार, बाजरा, कौनी, चेना, कुटकी, सावां और कोदो शामिल हैं. वर्तमान में बिहार में मक्का को छोड़कर दूसरे मोटे अनाज की खेती काफी कम है. (Image- Pixabay)
3/5कृषि विभाग किसानों को बीज पर 50 से 80 फीसदी तक अनुदान का प्रावधान कर रहा है. किसानों के सहयोग से गुणवत्तापूर्ण बीज का उत्पादन किया जाएगा. पहले चरण में ज्वार, बाजरा, मडुआ आदि के बीज किसानों में बांटे जाने की तैयारी है. (Image- Pixabay)
4/5किसान विज्ञान केंद्र (KVK) में किसानों को ट्रेनिंग दी जाएगी. साथ ही किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. मोटे अनाज की सरकार ब्रांडिंग करेगी. मोटे अनाज का बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निजी एजेंसियों और किसानों से मदद ली जाएगी. राज्य के दोनों कृषि विश्वविद्यालयों को आपसी समन्वय बनाकर उन्नत बीज का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं. (Image- Pixabay)
5/5कृषि विभाग के द्वारा भूमि संरक्षण पर जरूरत अनुसार रिसर्च के लिए भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा. 10 कृषि विज्ञान केंद्र को मोटे अनाज का बीज उत्पादन की जिम्मेदारी दी गई है. (Image- Pixabay)