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कमजोर मानसून के चलते खाने-पीने के सामान महंगे हो सकते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरी प्लेन खासकर गंगा से जुड़े क्षेत्रों में कम बारिश से खाद्य महंगाई बढ़ सकती है. क्योंकि कमजोर मानसून के चलते धान के उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा. देश के प्रमुख खेती वाले राज्य बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में बारिश कम हुई है.
कमजोर बारिश से धान का उत्पादन कम होगा. नतीजतन, निकट अवधि में चावल की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है. बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में 23 सितंबर तक खरीफ सीजन में धान कुल बुआई घटकर 24.1 फीसदी रही, जोकि पिछले साल 26 फीसदी थी. यह जानकारी इंडिया रेटिंग के मुताबिक है. रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में मानसून सामान्य से ज्यादा रही, लेकिन कुछ क्षेत्रों में मानसून की स्थिति कमजोर रही. 30 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक 92.5 cm की अच्छी बारिश रही, जोकि 86.86 cm के लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) से ज्यादा है.
देश के 6 राज्यों में बारिश कमजोर रही, जिसमें उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार शामिल हैं. इससे बुआई का रकबा 1.2 फीसदी घटकर 23 सितंबर तक 109.8 मिलियन हेक्टेयर ही रहा. इसमें सबसे कम बुआई धान, दलहन, तिलहन की हुई है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक FY23 में खरीफ फसलों का उत्पादन अनुमान 3.9 फीसदी घटकर 149.92 मिलियन टन रहने का है. एजेंसी के मुताबिक धान और दलहन के कमजोर उत्पादन की आशंका है. ये कमोडिटीज महंगाई बढ़ाने में सबसे ज्यादा सपोर्ट करते हैं.
बता दें कि अगस्त में चावल और उससे बने उत्पादों की होलसेल लेवल 6.6 फीसदी बढ़कर 63 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, जबकि दलहन और इससे जुड़े उत्पादों की महंगाई 2.6 फीसदी बढ़कर 6 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गई. हालांकि, मानसून में देरी और इसका अक्टूबर तक खींचना रबी फसल के लिए अच्छा है, जिसका पॉजिटिव असर उत्पादन पर नजर आ सकता है.