जानबूझकर डिफॉल्ट करने वालों को बैंक के साथ समझौते का रास्ता देने पर हुआ विरोध तो RBI ने जारी किए FAQs, कही ये बात

RBI Bank Default: जानबूझकर बैंक डिफॉल्ट करने वालों और बैंक लोन धोखाधड़ी के मामलों में बैंक के साथ समझौता करने का विकल्प देने के लिए कुछ निर्देश जारी किए थे, जिसपर अब आरबीआई की ओर से इसपर कुछ और बातें साफ की गई हैं.
जानबूझकर डिफॉल्ट करने वालों को बैंक के साथ समझौते का रास्ता देने पर हुआ विरोध तो RBI ने जारी किए FAQs, कही ये बात

RBI Bank Default: केंद्रीय रिजर्व बैंक ने पिछले हफ्ते जानबूझकर बैंक डिफॉल्ट करने वालों और बैंक लोन धोखाधड़ी के मामलों में बैंक के साथ समझौता करने का विकल्प देने के लिए कुछ निर्देश जारी किए थे, जिसपर बैंक कर्मचारी संगठनों की ओर से विरोध देखा गया था, इसके बाद अब आरबीआई की ओर से इसपर कुछ और बातें साफ की गई हैं. केंद्रीय बैंक का कहना है कि इन निर्देशों से बैंकिंग के मौजूदा सिस्टम को मजबूत करने में मदद मिली है.

आरबीआई ने क्या कहा?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा है कि जानबूझकर चूक करने वाले कर्जदारों के साथ समझौता समाधान और तकनीकी रूप से बट्टे खाते में डालने से संबंधित हालिया निर्देशों से बैंकों के लिए मौजूदा नियामकीय व्यवस्था को सुसंगत बनाने और बेहतर पारदर्शिता के लिए कुछ संबंधित प्रावधानों को सख्त करने में मदद मिली है.

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समझौते को लेकर क्या थे आरबीआई के निर्देश?

रिजर्व बैंक ने पिछले 8 जून को बाई-मंथली मॉनेटरी पॉलिसी के नतीजों में विनियमन के दायरे में आने वाली सभी इकाइयों के लिए एक व्यापक नियामकीय रूपरेखा जारी की थी. इसके तहत समझौता समाधान और तकनीकी रूप से बट्टे खाते में डाले जाने वाले मामलों की निगरानी की जानी है. हालांकि बैंकों के श्रमिक संगठन AIBOC और AIBEA ने रिजर्व बैंक के इस कदम का विरोध करते हुए कहा है कि कर्ज भुगतान में इरादतन चूक करने वालों के साथ समझौता के जरिये निपटारा करना एक गलत तस्वीर पेश करेगा.

इसके बाद केंद्रीय बैंक ने सोमवार को इससे संबंधित सवाल-जवाब (FAQs- frequently asked questions) जारी किए. FAQ में रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को धोखाधड़ी वाले खातों और इरादतन चूक के मामलों में समझौता समाधान के लिए नया प्रावधान लाए जाने के सवाल पर नकारात्मक जवाब दिया गया है. इसमें कहा गया है कि धोखाधड़ी और इरादतन चूक के मामलों में समझौता समाधान कोई नया नियामकीय निर्देश नहीं है और यह पिछले 15 साल से वजूद में है. इसके साथ ही FAQ में कहा गया है कि ऐसे मामलों में आठ जून को जारी सर्कुलर दंडात्मक उपायों को किसी भी तरह से कमजोर नहीं कर रहा है.

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