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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर से मौद्रिक नीति की समीक्षा में रेपो रेट (Repo Rate) में कोई भी बदलाव नहीं करने का फैसला किया है. ऐसे में अभी तमाम बैंकों की तरफ से एफडी (FD) पर जो ब्याज दरें ऑफर की जा रही हैं, वह काफी अच्छी हैं. इस तरह पूरी उम्मीद है कि यह ब्याज दरें अभी आने वाले दिनों में भी जारी रहेंगी. 6 अक्टूबर को हुई मीटिंग में यह फैसला किया गया है कि रेपो रेट को 6.50 फीसदी पर ही रखा जाएगा. इस स्थिति में अब बहुत सारे एफडी निवेशक सोच रहे हैं कि एफडी की ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी या नहीं? उनके अंदर एक कनफ्यूजन है कि उन्हें अब एफडी में पैसे लगाने चाहिए या अभी कुछ वक्त एफडी की ब्याज दरें बढ़ने का इंतजार करना चाहिए?
भारतीय रिजर्व बैंक का टारगेट होता है कि वह रिटेल महंगाई को 2-6 फीसदी के बीच में ही रखेगा. ऐसे में अगर महंगाई इस रेंज से ऊपर जाती है तो रिजर्व बैंक को बाजार में पैसों का सर्कुलेशन कम करने के लिए रेपो रेट में बढोतरी करनी पड़ती है. अगर कच्चे तेल को देखें इसी साल जून के महीने में कच्चा तेल करीब 75 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 90 डॉलर प्रति बैरल को भी पार कर गया है. इस तरह देखा जाए तो ये नहीं कह सकते कि महंगाई नहीं बढ़ी है. अब अगर महंगाई और बढ़ी, तो मुमकिन है कि रेपो रेट बढ़ेंगे और इस तरह एफडी रेट में भी बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, अभी तक के हिसाब से तो ऐसा लग रहा है कि रिजर्व बैंक आने वाले दिनों में शायद ही रेपो रेट बढ़ाए.
अगर बात एफडी निवेशकों की करें तो उन्हें अभी एफडी पर काफी अच्छा रेट मिल रहा है. आने वाले वक्त में रेपो रेट के बढ़ने के चांस काफी कम लग रहे हैं, ऐसे में एफडी रेट भी शायद ही बढ़ें. तो एफडी निवेशकों के लिए पैसे लगाने का ये अच्छा समय है. हालांकि, सवाल ये भी है कि आखिर किस अवधि के लिए निवेश करना सही रहेगा?
छोटी अवधि में ब्याज कम मिलता है और लंबी अवधि में पैसे लगाने पर एक डर ये है कि अगर ब्याज दरें बढ़ीं तो उसका फायदा आपको नहीं मिल पाएगा. ऐसे में एक अच्छा विकल्प ये है कि आप मिड टर्म की एफडी में पैसे लगाएं. कई बैंक 2-3 साल की एफडी पर काफी अच्छा ब्याज दे रहे हैं. मिड टर्म की एफडी को कुछ बैंक स्पेशल एफडी कहते हैं, तो आप उनमें पैसे लगा सकते हैं और फायदा कमा सकते हैं. ऐसे में अगर 2-3 साल के बाद आपको लगता है कि एफडी रेट बेहतर हो गए हैं तो आप उन्हें नए एफडी प्लान में री-इन्वेस्ट कर सकते हैं. वहीं मिड टर्म की एफडी पर भी आपको करीब 7 फीसदी ब्याज मिल जाएगा, तो अगर रेपो रेट घटता है और एफडी रेट भी घटते हैं तो भी आपको नुकसान नहीं होगा.
लंबी अवधि की एफडी में निवेश करना सिर्फ तभी फायदे का सौदा होता है जब आपको ये अच्छे से पता हो कि इस वक्त ब्याज दरें अपने उच्चतम स्तर पर हैं. वैसे तो अभी एफडी दरें काफी ऊंचे लेवल पर हैं, लेकिन पूरे भरोसे के साथ ये नहीं कहा जा सकता है आने वाले दिनों में यह और नहीं बढ़ेंगी. इस तरह एफडी में निवेश करने का सबसे अच्छा तरीका यही होता है कि मिड टर्म के लिए पैसे लगाएं और उसके बाद जैसा मार्केट हो उसी के हिसाब से पैसों को री-इन्वेस्ट कर दें. इससे एक तो आपके पैसे लंबे वक्त के लिए लॉक नहीं होते हैं, वहीं आपसे कोई बेहतर इन्वेस्टमेंट का मौका भी नहीं छूटता है.