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सिविल एविएशन मिनिस्टर के. राममोहन नायडू ने बुधवार को कहा कि सरकार भारत में विमान विनिर्माण की योजना को आगे बढ़ाने के लिए एक विशेष इकाई (SPV) स्थापित करने पर विचार कर रही है. भारतीय वायुयान विधेयक-2024 को अगस्त में लोकसभा में पारित किया गया था. इसमें विमान के 'डिजाइन' और विनिर्माण को विनियमित करने के प्रावधान शामिल हैं, जो आत्मनिर्भरता के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' पहल का समर्थन करता है.
नायडू ने कहा कि सरकार भारत द्वारा विमान विनिर्माण के विचार को मजबूती से आगे बढ़ा रही है. उन्होंने कहा कि उद्योग के हितधारकों और अन्य लोगों के साथ मिलकर एक विशेष इकाई लगाई जाएगी.
मंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि अगले पांच वर्षों में विमान विनिर्माण गतिविधियां शुरू हो सकें. नायडू ने कहा, "हम विमानों के विनिर्माण की बड़ी कंपनी बनना चाहते हैं और उनका निर्यात भी करना चाहते हैं."
भारत विमान विनिर्माता कंपनियों बोइंग और एयरबस के लिए एक प्रमुख बाजार है. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पहले से ही छोटे पैमाने पर छोटे नागरिक विमानों का विनिर्माण कर रही है. भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते सिविल एविएशन मार्केट में से एक है.
उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में नायडू ने कहा कि देश में रखरखाव, ओवरहाल तथा मरम्मत (एमआरओ) गतिविधियों के लिए अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय विमानन क्षेत्र बदलाव की राह पर है और इसका मकसद देश को विमानन, हवाई मार्ग से ढुलाई और एमआरओ गतिविधियों का केन्द्र बनाना है.
भारतीय वायुयान विधेयक-2024 का मकसद इसमें निरर्थक चीजों को दूर करना है. इसमें अभी तक 21 बार संशोधन किया जा चुका है. यह विमान अधिनियम 1934 की जगह लेगा.