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कहा जाता है कि अति हर चीज की खराब होती है. मोबाइल लोगों की जिंदगी को सुविधाजनक बनाने के लिए लाया गया, लेकिन ये धीरे-धीरे उनकी लत बन गया. आज के समय में लोग एक मिनट के लिए भी मोबाइल को खुद से दूर नहीं रखना चाहते. मोबाइल अगर थोड़ा इधर-उधर हो जाए तो लोग तनाव में आ जाते हैं. ये स्थितियां लोगों को नोमोफोबिया (Nophobia) का शिकार बना रही हैं. सबसे ज्यादा इसका असर किशोरों और नौजवानों में देखने को मिल रहा है. यहां जानिए क्या होता है नोमोफोबिया, क्या हैं इसके लक्षण और बचाव के तरीके-
नोमोफोबिया शब्द 'नो मोबाइल फोबिया' से मिलकर बना है. जब किसी व्यक्ति को मोबाइल की लत इस कदर हो जाती है कि जरा सी दर मोबाइल से दूर रहने पर तनाव हो जाता है, तो इसे नोमोफोबिया कहा जाता है. ये एक साइकोलॉजिकल कंडीशन है.नोमोफोबिया व्यक्ति के दिमाग पर असर डालता है.
इस मामले में डॉ. रमाकान्त शर्मा कहते हैं कि नोमोफोबिया को मानसिक विकार बेशक न कहा जाए, लेकिन इसका असर दिमाग पर जरूर पड़ता है. इसकी वजह से शरीर में मेलाटोनिन की मात्रा कम होती है और नींद आने में दिक्कत आती है. नींद न आने से शरीर में थकान, सुस्ती, एकाग्रता में कमी, छोटी-छोटी बात पर गुस्सा, चिड़चिड़ाहट, सिर दर्द और अन्य तरह की तमाम दिक्कतें होने लगती हैं. इसके अलावा नोमोफोबिया व्यक्ति की आंखों पर भी बुरा असर डालता है. इसके कारण आंखों से पानी आने की समस्या हो सकती है, जो Vision Syndrome का रूप ले सकती है.