Jute Packaging: आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने जेपीएम अधिनियम, 1987 के तहत जूट वर्ष 2023-24 के लिए जूट पैकेजिंग सामग्री के लिए आरक्षण मानदंडों को मंजूरी दी. इसके तहत 100 फीसदी खाद्यान्न (Foodgrains) और 20 फीसदी चीनी (Sugar) की जूट की थैलियों में पैकिंग करना अनिवार्य होगा. इस फैसले से जूट मिलों और सहायक इकाइयों में काम करने वाले 4 लाख श्रमिकों को राहत मिलने के साथ ही लगभग 40 लाख किसान परिवारों को समर्थन मिलेगा. जूट वर्ष एक जुलाई से 30 जून तक होता है.

पैकेजिंग में जूट के थैलों का इस्तेमाल

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एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि इस प्रस्ताव से भारत में कच्चे जूट और जूट पैकेजिंग सामग्री के घरेलू उत्पादन क्षेत्र के हितों की रक्षा होगी. कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में लिए गए फैसले के बारे में जानकारी देते हुए कहा गया, जूट वर्ष 2023-24 के लिए अनुमोदित अनिवार्य पैकेजिंग मानदंडों के तहत 100 फीसदी खाद्यान्न और 20 फीसदी चीनी की जूट की थैलियों में पैकिंग करना होगा.

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12,000 करोड़ रुपये के जूट बोरे खरीदती है सरकार

जूट पैकेजिंग सामग्री के आरक्षण के तहत देश में उत्पादित कच्चे जूट का लगभग 65 प्रतिशत खपत होता है. विज्ञप्ति में कहा गया कि इस फैसले से पर्यावरण की रक्षा में मदद मिलेगी. केंद्र सरकार खाद्यान्नों की पैकिंग के लिए हर साल लगभग 12,000 करोड़ रुपये के जूट बोरे खरीदती है. यह कदम जूट किसानों और श्रमिकों की उपज के लिए गारंटीड मार्केट सुनिश्चित करता है.

जूट उद्योग आम तौर पर भारत की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और विशेष तौर पर पूर्वी क्षेत्र यानी पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, त्रिपुरा, मेघालय, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, यह पूर्वी क्षेत्र, विशेषकर पश्चिम बंगाल के प्रमुख उद्योगों में से एक है.

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40 लाख किसानों को होगा फायदा

जेपीएम अधिनियम के तहत आरक्षण संबंधी मानदंड जूट के क्षेत्र में 4 लाख श्रमिकों और 40 लाख किसानों को सीधे रोजगार प्रदान करते हैं. जेपीएम अधिनियम, 1987 जूट किसानों, श्रमिकों और जूट के सामान के उत्पादन में लगे लोगों के हितों की रक्षा करता है. जूट उद्योग के कुल उत्पादन का 75 फीसदी हिस्सा जूट के थैले हैं, जिसमें से 85 फीसदी हिस्से को भारतीय खाद्य निगम (FCI) एवं राज्य खरीद एजेंसियों (SPA) को आपूर्ति की जाती है और बाकी को सीधे निर्यात / बेचा जाता है.

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जूट की बोरियों का औसत उत्पादन लगभग 30 लाख गांठ (9 लाख मीट्रिक टन) है और सरकार जूट किसानों, श्रमिकों और जूट उद्योग में लगे लोगों के हितों की रक्षा के लिए जूट की बोरियों के उत्पादन का पूरा उठाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.