शार्क टैंक इंडिया के तीसरे सीजन (Shark Tank India-3) में हाल ही में एक ऐसा स्टार्टअप (Startup) आया, जिसने तमाम जज को डरा दिया. इसमें अचानक से शार्क टैंक इंडिया के सेट पर सेना के कई जवान जैसे लोग हाथों में बंदूकें लिए घुस गए और चारों ओर देखते हुए उस जगह को सुरक्षित बनाने की कोशिश करने लगे. उसके बाद जब उन्होंने कहा कि सब कुछ ठीक है, तब मंच पर एंट्री हुई एक रिटायर्ड स्पेशल फोर्स सोल्जर अनिल मलिक की, जो असल में अपना स्टार्टअप आइडिया लेकर वहां पहुंचे थे. इनके स्टार्टअप का नाम है Spec Ops (Special Operations), जो आर्मी के जवानों की जरूरत के हिसाब से कपड़े डिजाइन करता है.

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अनिल मलिक ने ऑपरेशन पराक्रम, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन विजय (करगिल) में हिस्सा लिया और देश की रक्षा में अपना योगदान दिया. 2002 में सेना ने अनिल को मौका दिया कि वह यूएस स्पेशल फोर्सेस के साथ ट्रेनिंग कर सकें. वहां अनिल ने देखा कि यूएस आर्मी के पास बहुत सारे खास कपड़े और टूल्स हैं. हमने सोचा कि अगर यहां भी ऐसा हो तो इससे हमारे जवानों को बहुत मदद मिल सकती है, जिसके बाद उन्होंने Spec Ops स्टार्टअप की शुरुआत की. 

सेना के 16 लाख जवानों को मुहैया कराएंगे प्रोडक्ट

इस कंपनी का मकसद है कि ऑपरेशन को मद्देनजर रखते हुए प्रोडक्ट को डिजाइन किया जाए, ताकि सैनिक उसे इस्तेमाल कर के मदद ले सकें. यह पहली ऐसी कंपनी है, जिसके कार्गो में लाइक्रा है, जो बहुत ही ज्यादा स्ट्रेच हो सकते हैं. इसमें बहुत सारे पॉकेट भी दिए हैं ताकि सोल्डर अपने सामान आसानी से कैरी कर सके. अनिल इसी तरह के बहुत सारे प्रोडक्ट बनाकर 16 लाख सोल्जर को मुहैया कराना चाहते हैं. 

सैनिकों को सामान अलग-अलग जगह से डिलीवर होता है. उनकी रिक्वायरमेंट सप्लाई के जरिए नहीं आ सकती है. ऐसे में अगर उन्हें कुछ खास रिक्वायरमेंट होती है, तो वहां पर Spec Ops जैसी कंपनियां प्रोडक्ट मुहैया कराती हैं. साथ ही हम स्पेशल ऑपरेशन के हिसाब से भी चीजें बनाते हैं. अनिल बताते हैं कि उनका ग्राहक सरकार नहीं है, बल्कि इंडिविजुअल सोल्जर हैं, क्योंकि वह खुद टेंडर में हिस्सा नहीं लेते हैं. इन शूट को डीलर्स को मुहैया कराया जाता है और वह उसे सेना के लोगों को देते हैं. जैसे यह आर्मी कैंटीन को देते हैं. 

300 से ज्यादा एसकेयू, ₹1800 करोड़ का मार्केट

डीलर्स से या तो सरकार लेती है या फिर इसे खुद सेना के जवान खरीदते हैं. अनिल बताते हैं कि उनके पास आर्मी की दी हुई दो यूनिफॉर्म थीं, जबकि उनकी खुद की खरीदी हुई 20 से भी ज्यादा यूनिफॉर्म थीं. बता दें कि इस स्टार्टअप के प्रोडक्ट सिर्फ फौजी ही नहीं खरीद रहे, बल्कि नॉन फौजी भी खरीद रहे हैं. हालांकि, अभी उनकी संख्या बहुत कम है. जो प्रोडक्ट हम बनाते हैं, उनमें ट्रैक शूट, टी-शर्ट, शॉर्ट्स, शॉक्स, कैप, विंटर कैप हैं. इनका मार्केट साइज करीब 1800 करोड़ रुपये. अभी कंपनी के पास 300 से भी ज्यादा एसकेयू हैं.

पहले लोग सस्ते प्रोडक्ट लेना चाहते थे, लेकिन अब क्वालिटी प्रोडक्ट लेना चाहते हैं. वहीं इसमें कोई ब्रांड नहीं है. अनिल का विजन है कि वह एक बड़ा ब्रांड बनाएं और सभी को प्रोडक्ट मुहैया कराएं. अनिल बोले कि शार्क टैंक से उन्हें जो मार्केटिंग मिलेगी, उससे वह डी2सी मार्केट में स्केल करेंगे.

8 करोड़ रुपये की कमाई कर रहा ये बिजनेस!

पिछले साल यानी 2022-23 में इस स्टार्टअप ने 6.26 करोड़ रुपये की सेल की है. उससे पहले 2021-22 में रेवेन्यू 5.6 करोड़ रुपये था, जबकि 2020-21 में कंपनी ने 2.95 करोड़ रुपये कमाए थे. अभी ये कंपनी बूटस्ट्रैप्ड है और साथ ही प्रॉफिटेबल भी है. अनिल को उम्मीद है कि इस साल यानी 2023-24 में कंपनी का रेवेन्यू 8 करोड़ रुपये के करीब रह सकता है. इस कंपनी का सबसे ज्यादा बिकने वाला प्रोडक्ट है कार्गो, जिससे लगभग 35 फीसदी रेवेन्यू आता है. वहीं 35-40 फीसदी रेवेन्यू अलग-अलग तरह की टी-शर्ट से आती है.

अपनी पिच में इस स्टार्टअप ने 40 करोड़ रुपये के वैल्युएशन पर 2 फीसदी इक्विटी के बदले 80 लाख रुपये मांगे थे. हालांकि, काफी नेगोशिएशन के बाद 20 करोड़ रुपये के वैल्युएशन पर अमन गुप्ता और अमित जैन ने मिलकर 2 फीसदी इक्विटी के बदले 40 लाख रुपये ऑफर किए. वहीं उन्होंने बाकी के 40 लाख रुपये 2 साल के लिए 12 फीसदी की दर पर कर्ज के तौर पर दिए.